देशव्यापी मनरेगा बचाओ संग्राम के तहत 10 जनवरी को करनाल से कार्यक्रम की शुरुआत
करनाल, 8 जनवरी () : जिला कांग्रेस कमेटी के शहरी जिलाध्यक्ष पराग गाबा ने कहा कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में किए जा रहे बदलाव गरीबों और ग्रामीण मजदूरों के हितों के खिलाफ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नए कानून के तहत मनरेगा को उसकी मूल भावना से कमजोर किया जा रहा है, जिससे रोजगार अब अधिकार न रहकर सरकार की मर्जी पर निर्भर हो जाएगा। पराग गाबा ने कहा कि मनरेगा एक मांग आधारित योजना थी, जिसने हर वर्ष पांच से छह करोड़ ग्रामीण परिवारों को आर्थिक संकट के समय राहत दी। पहले ग्राम सभाएं और पंचायतें स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनाती थीं, लेकिन अब निर्णय लेने की पूरी शक्ति केंद्र सरकार के हाथ में सौंप दी गई है, जिससे पंचायतें केवल औपचारिक भूमिका तक सीमित रह जाएंगी। उन्होंने कहा कि काम केवल उन्हीं पंचायतों में मिलेगा जिन्हें केंद्र सरकार अधिसूचित करेगी। इससे कई पंचायतें फंड से वंचित हो जाएंगी और स्थानीय विकास योजनाएं प्रभावित होंगी, जो 73वें संविधान संशोधन की भावना के खिलाफ है। नए कानून में बजट और मानक आवंटन पहले से तय कर दिए गए हैं, जिससे फंड खत्म होते ही काम बंद हो जाएगा। गाबा ने कहा कि मनरेगा में महंगाई से जुड़ी अधिसूचित मजदूरी की व्यवस्था थी, जिसे नए कानून में समाप्त कर दिया गया है। इसके अलावा कृषि के पीक सीजन में अब 60 दिन का काम भी नहीं मिलेगा। उन्होंने मांग की कि नए कानून को तुरंत रद्द कर मनरेगा को उसके मूल स्वरूप में बहाल किया जाए। पराग गाबा ने बताया कि कांग्रेस पार्टी मनरेगा को बचाने के लिए देशव्यापी मनरेगा बचाओ संग्राम चलाएगी, जिसकी शुरुआत 10 जनवरी को करनाल से की जाएगी।
