हरियाणा के जेल महानिदेशक आलोक राय ने जिला जेल का किया निरीक्षण, संचालित वोकेशनल ट्रेनिंग, आईटीआई कोर्स और कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियों की ली जानकारी

करनाल, 27 दिसंबर। हरियाणा के जेल महानिदेशक आलोक राय ने शनिवार को जिला जेल का निरीक्षण करने के लिए करनाल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जेल में बंद कैदियों के रहन-सहन, स्वच्छता व्यवस्था, सुरक्षा इंतजामों और उनके लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं का जायजा लिया। निरीक्षण के समय जेल में संचालित वोकेशनल ट्रेनिंग, आईटीआई कोर्स और कौशल विकास से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी भी अधिकारियों से ली।
निरीक्षण के उपरांत मीडिया से बातचीत में जेल महानिदेशक आलोक राय ने कहा कि हरियाणा की जेलों में लंबे समय से चले आ रहे गैंगस्टर कल्चर और जेल से संचालित आपराधिक गतिविधियों पर पूरी तरह अंकुश लगाने के लिए बड़े स्तर पर बदलाव किए गए हैं। जेलों में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ सुधारात्मक सोच को प्राथमिकता दी गई है। अब जेल अपराध का अड्डा नहीं, बल्कि सुधार, कौशल विकास और समाज की मुख्यधारा में वापसी का केंद्र बन रही हैं। इसके लिए कैदियों को प्रशिक्षण, काउंसलिंग और रोजगार से जोडऩे की ठोस योजना लागू की गई है।
उन्होंने कहा कि उनकी नियुक्ति के तुरंत बाद जेलों में आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने की रणनीति तैयार की गई। पहले ही सप्ताह में गैंगस्टर और कुख्यात अपराधियों की पहचान कर उन्हें अलग-अलग जेलों में स्थानांतरित किया गया। इस सख्त कदम का असर यह रहा कि जेल से फिरौती मांगने, धमकी देने या मोबाइल के जरिए किसी तरह की आपराधिक गतिविधि की कोई घटना सामने नहीं आई। उन्होंने कहा कि गैंगस्टर कल्चर को खत्म करना इसलिए जरूरी था, ताकि युवा पीढ़ी अपराधियों से प्रभावित न हो। उन्होंने बताया कि पहली बार जेलों में गैंगस्टर को भी साफ-सफाई और अन्य सुधारात्मक कार्यों से जोड़ा गया। इससे उनमें अनुशासन बढ़ा और अपराध के प्रति आकर्षण कम हुआ। उन्होंने दावा किया कि पिछले चार महीनों से सोशल मीडिया पर किसी भी गैंगस्टर की सक्रियता देखने को नहीं मिली है।
एक सवाल के जवाब में आलोक राय ने बताया कि जेल में आने वाले करीब 60 प्रतिशत कैदी मानसिक तनाव और अवसाद से जूझते हैं। कई बार पारिवारिक, आर्थिक या सामाजिक परिस्थितियों के कारण उनसे अपराध हो जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए हर जेल में काउंसलर नियुक्त किए गए हैं, ताकि कोई भी कैदी अवसाद में आकर आत्मघाती कदम न उठाए और मानसिक रूप से मजबूत बन सके।
उन्होंने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था केवल सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि कैदियों के सुधार पर भी जोर देती है। जेल विभाग का उद्देश्य है कि सजा पूरी करने के बाद कैदी समाज की मुख्यधारा में लौटें और सम्मान के साथ जीवन जी सकें। इसके लिए जेलों में सकारात्मक माहौल तैयार किया जा रहा है। हरियाणा जेल विभाग ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम के साथ समझौता किया है। इसके तहत जेलों में वोकेशनल ट्रेनिंग लेने वाले कैदियों को एचकेआरएन पोर्टल पर रजिस्टर किया जाएगा। इससे रिहाई के बाद उन्हें रोजगार के अवसर मिल सकेंगे। गुरुग्राम, अंबाला, करनाल, पानीपत और फरीदाबाद की जेलों में वोकेशनल ट्रेनिंग के साथ आईटीआई कोर्स भी शुरू किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि हरियाणा की जेलों की मौजूदा क्षमता करीब 23 हजार कैदियों की है, जबकि फिलहाल लगभग 27 हजार कैदी जेलों में बंद हैं। इस दबाव को कम करने के लिए नए निर्माण किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि, रेवाड़ी में नई जेल बनकर तैयार हो चुकी है। रोहतक में एक अत्याधुनिक हाई सिक्योरिटी जेल का निर्माण तेजी से चल रहा है, जो अगले चार महीनों में पूरा होगा। इसके अलावा फतेहाबाद और पलवल में नई जेलें निर्माणाधीन हैं, जबकि अंबाला और पंचकूला में भी नई जेलों का निर्माण प्रस्तावित है। उन्होंने कहा कि विभाग का लक्ष्य है कि जेल में आने वाले हर व्यक्ति को किसी न किसी प्रकार की ट्रेनिंग जरूर दी जाए। इससे रिहाई के बाद वह आत्मनिर्भर बन सकेगा और समाज की मुख्यधारा में लौटकर बेहतर भविष्य बना सकेगा। इस मौके पर जेल उप अधीक्षक लखबीर बराड़ सहित पुलिस विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।

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