सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बिखेरी छटा
गीता पर अमल कर जीवन को बनाएं सरल-कश्यप
करनाल, 1 दिसंबर। जिला स्तरीय गीता जयंती महोत्सव के तीसरे दिन आज समापन समारोह में डा. मंगलसेन ऑडिटोरियम में सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने अनूठी छटा बिखेरी। स्कूली विद्यार्थियों द्वारा गीता के 18 श्लोकों का सामूहिक उच्चारण किया गया। मुख्य अतिथि इंद्री के विधायक एवं मुख्य सचेतक रामकुमार कश्यप ने लोगों से गीता पर अमल कर जीवन को सरल बनाने की अपील की।
आज कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना से की गई। इसके बाद राधा-कृष्ण, महाभारत प्रसंग आदि को लेकर मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। स्कूली बच्चों ने शिव तांडव और डीपीएस के विद्यार्थियों ने महाभारत प्रसंग पर भव्य प्रस्तुति दी। तन्नु शर्मा म्यूजिक ग्रुप ने राधा-कृष्ण पर भव्य नृत्य प्रस्तुत किया। स्कूली बच्चों ने गीता के 18 श्लोकों का सामूहिक उच्चारण किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक एवं मुख्य सचेतक रामकुमार कश्यप ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि गीता का जन्म 5163 साल पहले कुरुक्षेत्र के महाभारत युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को कर्तव्य का बोध और उसकी भ्रमित अवस्था को दूर करने के लिए दिए गए संदेश से हुआ। गीता का संदेश है-फल की चिंता किए बिना कर्म करो।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे पढ़ाई रूपी कर्म को पूरी मेहनत से करें, परिश्रम का फल जरूर मिलेगा। श्री कश्यप ने कहा कि गीता सार के अनुसार आत्मा अमर है। धर्म और कर्तव्य सर्वोपरि हंै। मन पर नियंत्रण सबसे बड़ी विजय है। सुख-दुख, लाभ-हानि आदि परिस्थितियों में विचलित न होकर कार्य करना है। भगवान हर समय साथ हैं। उन्होंने कहा कि गीता निराशा में आशा, दुख में धैर्य, भ्रम में स्पष्टता, संकट में साहस, मोह में विवेक और कर्तव्य में धीरता सिखाती है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे गीता के महत्व को समझें, नियमित गीता का पाठ करते हुए पढ़ाई पर फोकस करें। उन्होंने भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री के संकल्प को पूरा करने के सहयोग की अपील की।
फल की इच्छा बिना कर्म करने के संदेश पर करें अमल-जगमोहन आनंद
इससे पहले स्थानीय विधायक जगमोहन आनंद ने गीता जयंती की शुभकामनाएं व बधाई दी। उन्होंने कहा कि गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज ने वैश्विक स्तर पर गीता ज्ञान महोत्सव की अलख जगाई है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और करनाल के सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के अथक प्रयासों से आज अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गीता जयंती महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। गीता के पावन ग्रंथ की घरों में मान्यता है। गीता के इस संदेश-कर्म किए जा, फल की इच्छा न कर पर सभी को अमल करना चाहिए।
गीता का हर श्लोक प्रेरणादायक-कबीरपंथी
नीलोखेड़ी के विधायक भगवानदास कबीरपंथी ने कहा कि आज मोक्ष दायिनी एकादशी के दिन ही 5163 साल पहले भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को संदेश दिया था। भगवान श्रीकृष्ण के मुखारविंद से निकला एक-एक शब्द श्रीमद्भागवत गीता के रूप में मौजूद है। उन्होंने कहा कि गीता केवल एक ग्रंथ नहीं है, इसका एक-एक श्लोक प्रेरणादायक है। विधायक ने गीता जयंती समारोह के विस्तार के लिए पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल, गीता मनीषी ज्ञानानंद महाराज के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि आज विदेशी भी गीता के महत्व को समझने लगे हैं।
गीता मानव कल्याण का ग्रंथ-संजय
विभाग प्रचारक संजय ने कहा कि बाइबल के बाद सबसे बड़ा अनुवादित ग्रंथ गीता है। गीता भारत के अलावा विदेशों में भी सब भाषाओं में उपलब्ध है। यह ऐसा ग्रंथ है जिसका कहीं विरोध नहीं है। गीता में हर समस्या का समाधान है। यह मानव कल्याण का ग्रंथ है। पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम भी गीता का अध्ययन करते थे। गीता में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के बीच हुए संवाद को उद्धृत किया गया है।
समापन समारोह में 24 सौ बच्चों ने की शिरकत
डा. मंगलसेन सभागार में आयोजित गीता जयंती के समापन समारोह में आज विभिन्न स्कूलों के 24 सौ विद्यार्थियों ने भाग लिया। जिला के विभिन्न स्कूलों में 5163 विद्यार्थियों ने गीता श्लोकोच्चारण किया।
ये रहे मौजूद
इस मौके पर सीटीएम मोनिका, नीलोखेड़ी के विधायक भगवानदास कबीरपंथी, कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य जितेंद्र अहलावत, संकल्प भंडारी, जिओ परिवार से श्याम बतरा, भाजपा मंडल अध्यक्ष राममेहर तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
