रत्नावली समारोह धूमधाम व हर्षोउल्लास से संपन्न
फिर दोबारा मिलने के साथ विदा हुए कलाकार
कुरुक्षेत्र, 31 अक्टूबर। हरियाणवी संस्कृति का परिचायक रत्नावली समारोह सबके दिलों पर अमिट छाप छोड़ गया है। चार दिनों तक चला हरियाणवी संस्कृति का महाकुंभ शुक्रवार को धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। प्रदेश भर से आए 3500 करीब कलाकार दोबारा मिलने का वादा कर विदा हुए। 6 मंचों पर 34 विधाओं में 3500 कलाकारों ने चार दिनों तक खूब धमाल मचाया। हरियाणा की संस्कृति का हर रंग रत्नावली के मंच पर दिखाई दिया। जितने अच्छे ढंग से युवा कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी, उतने ही अच्छे ढंग से दर्शकों ने उनकी हौसला अफजाई की। इस बार का उत्सव कई दृष्टि से खास रहा। खासतौर पर कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा द्वारा हरियाणवी बोली को भाषा के रूप में स्थापित करने का प्रयास तथा लोक सांझी को हरियाणा की लोक कला के रूप में पहचान दिलाने का काम भी काबिले तारीफ रहा। रत्नावली समारोह में हरियाणा की 34 लोक विधाओं की प्रस्तुति ने जहां सबका मनोरंजन किया वहीं समारोह में लगा हस्तशिल्प मेला भी युवाओं को स्वावलंबी बनाने तथा एक कार्यशाला के रूप में अपनी अमिट छाप छोड़ गया। आत्मनिर्भर भारत, स्वावलंबी युवा, स्वदेशी का प्रयोग, प्लास्टिक रहित ऐसे कई विषयों को लेकर लगा हस्तशिल्प मेला हर किसी के आकर्षण का केन्द्र रहा। युवाओं को जहां अपने पांव पर खड़े होने का मौका मिला वहीं उनमें आत्मविश्वास की भावना भी पैदा हुई। इस बार के रत्नावली समारोह की सारी व्यवस्था विद्यार्थियों ने संभाली थी। यह कहने में भी कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी कि रत्नावली समारोह छात्रों के लिए कार्यशाला के रूप में भी अपनी पहचान बना गया है।
