श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में सतर्कता सप्ताह पर सेमिनार आयोजित
कुरुक्षेत्र। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय में सतर्कता जागरूकता सप्ताह के उपलक्ष्य में गुरुवार को सेमिनार आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने की। इस अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि सीजेएम नीतिका भारद्वाज और सिटी मजिस्ट्रेट आशीष कुमार ने शिरकत की, जबकि कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से डॉ. रमेश कुमार और डॉ. प्रियंका चौधरी ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार साझा किए।
मुख्य अतिथि सीजेएम नीतिका भारद्वाज ने कहा कि सतर्कता केवल भ्रष्टाचार से लड़ने का माध्यम नहीं, बल्कि यह हमारी कार्य संस्कृति और नैतिकता का मूल है। उन्होंने कहा कि जब हम अपने कार्य के प्रति जिम्मेदारी और पारदर्शिता से पेश आते हैं, तभी हम एक सशक्त और ईमानदार व्यवस्था का निर्माण कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सतर्कता कोई एक सप्ताह का विषय नहीं होना चाहिए, बल्कि यह जीवन की स्थायी आदत बननी चाहिए।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि सतर्कता जागरूकता सप्ताह देश के लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। पटेल जी ने अपने जीवन से दिखाया कि सच्ची निष्ठा और अटूट ईमानदारी से ही राष्ट्र की एकता और विकास संभव है। ईमानदारी केवल व्यक्तिगत गुण नहीं, बल्कि यह एक राष्ट्रीय कर्तव्य है। जब हम अपने कार्य में पारदर्शिता, अनुशासन और निष्ठा अपनाते हैं, तो हम देश की प्रगति में सीधा योगदान देते हैं। उन्होंने सभी शिक्षकों, कर्मचारियों और विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने जीवन में “सतर्कता” और “सदाचार” को अपनाकर एक जिम्मेदार नागरिक बनें।
देश की उन्नति हमारे कर्तव्यों पर निर्भर करती है: आशीष
सिटी मजिस्ट्रेट आशीष कुमार ने कहा कि हमारे देश की उन्नति इस बात पर निर्भर करती है कि हम अपने कर्तव्यों को कितनी निष्ठा और ईमानदारी से निभाते हैं। जब हर व्यक्ति अपने स्तर पर सजग और जिम्मेदार बनता है, तो किसी भी संस्था या समाज में भ्रष्टाचार की कोई जगह नहीं रहती। उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि वे किसी भी प्रकार की अनैतिकता से समझौता न करें और अपने अंदर ‘सतर्क नागरिक’ की भावना को विकसित करें।
ईमानदारी केवल दफ्तर या कामकाज तक सीमित नहीं होनी चाहिए
मुख्य वक्ता डॉ. प्रियंका चौधरी ने सतर्कता को सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कहा कि ईमानदारी केवल दफ्तर या कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे पूरे जीवन का दर्शन होना चाहिए। हमें खुद को ईमानदार बनाना है और यदि कोई व्यक्ति गलत कार्य करता है तो उसके खिलाफ बोलने का साहस भी दिखाना होगा। उन्होंने बताया कि जब नागरिक समाज ईमानदार होगा, तभी प्रशासनिक और राजनीतिक व्यवस्था भी सुदृढ़ बनेगी।
वहीं,डॉ. रमेश कुमार ने अपने वक्तव्य में घरेलू हिंसा, महिलाओं के प्रति अपराध, कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न और आंतरिक शिकायत समिति (ICC) के प्रावधानों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सच्ची सतर्कता केवल वित्तीय पारदर्शिता नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय समानता की भावना से भी जुड़ी है। जब हम अन्याय या भेदभाव के खिलाफ खड़े होते हैं, तब हम वास्तव में सतर्क नागरिक बनते हैं। कार्यक्रम में आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, प्रॉक्टर प्रो. सतीश वत्स व प्रो. शुभा कौशल समेत अन्य उपस्थित रहे।
