नीलोखेड़ी/ करनाल, 15 अक्तूबर। विस्तार शिक्षा संस्थान नीलोखेड़ी में महिला किसान दिवस 2025 का आयोजन महिला सशक्तिकरण और कृषि में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करने के उद्देश्य से किया गया। यह कार्यक्रम भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के निर्देशन में देशभर के चारों विस्तार शिक्षा संस्थानों के संयुक्त प्रयास से संपन्न हुआ। इस वर्ष का विषय था समृद्ध राष्ट्र हेतु महिला किसानों का सशक्तिकरण।
इस अवसर पर कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव डा. देवेश चतुर्वेदी, अतिरिक्त सचिव, विस्तार डा. पी.के. मेहेरदा, संयुक्त सचिव, विस्तार संजय कुमार अग्रवाल एवं निदेशक विस्तार डा. शैलेश कुमार मिश्रा ऑनलाइन माध्यम से जुड़े और देशभर की महिला किसानों से संवाद किया। उन्होंने महिला किसानों को कृषि में नवाचार अपनाने, समूह आधारित उद्यम स्थापित करने और सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।
सीसीएस हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के निदेशक (विस्तार शिक्षा) डॉ. बलवान मंडल कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र हरियाणा के प्रत्येक जिले में महिला किसानों को प्रशिक्षण, उद्यमिता और तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल खेतों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन के सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दे रही हैं।
विस्तार शिक्षा संस्थान के क्षेत्रीय निदेशक डा. संजय कुमार ने स्वस्थ जीवन को प्रोत्साहन देने में महिला किसानों की भूमिका विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि महिलाएं न केवल कृषि उत्पादन में, बल्कि पोषण, परिवार स्वास्थ्य और सतत कृषि प्रणाली के संरक्षण में भी अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। कार्यक्रम में 96 महिला किसान और 10 प्रगतिशील महिला किसान शामिल हुईं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए यह संदेश दिया कि समर्पण, प्रशिक्षण और सही दिशा में प्रयास से ग्रामीण महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं। कुरुक्षेत्र की उषा रानी, जो अचार, गुलकंद, मुरब्बा और शहद उत्पादन में कार्यरत हैं, ने कहा कि खेती में आमदनी कम थी, इसलिए मैंने घर पर बनने वाले अचार और मुरब्बे को बाजार में बेचना शुरू किया। आज हमारे उत्पाद स्वयं सहायता समूह के माध्यम से मंडियों और शहरों में पहुँच रहे हैं। एक किलो अचार पर 70 से 80 रुपये की लागत आती है और 150 से 200 रुपये में बिकता है।  उन्होंने अन्य महिलाओं को संदेश दिया कि महिलाएं आत्मनिर्भर बनें, एसएचजी से जुड़ें और सरकार की योजनाओं का लाभ लें। करनाल की सीता देवी और गीता देवी, जो ड्रोन दीदी योजना के तहत प्रशिक्षित ड्रोन ऑपरेटर हैं, ने आधुनिक कृषि में तकनीक की भूमिका पर प्रकाश डाला। सीता देवी ने बताया कि पहले एक एकड़ में दवा छिडक़ने में 3-4 घंटे लगते थे, अब ड्रोन से यह काम 10-15 मिनट में हो जाता है। सरकार से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी मिली है, जिससे हमें आत्मनिर्भर बनने में मदद मिली है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को नई तकनीक सीखनी चाहिए और आधुनिक कृषि में अपनी सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। ड्रोन दीदी योजना महिलाओं के लिए एक सुनहरा अवसर है।
इस अवसर पर डा. सत्यकाम मलिक, डा. जसविंदर कौर, अनिल रोहिल्ला, कृषि विज्ञान केंद्र, करनाल के वरिष्ठ समन्वयक, तथा विस्तार शिक्षा संस्थान नीलोखेड़ी के सभी संकाय सदस्य और कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन डा. एस.आर. वर्मा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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