एडीसी सोनू भट्ट की अध्यक्षता में पीएनडीटी की बैठक आयोजित, अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश
करनाल, 9 अक्तूबर। एडीसी सोनू भट्ट ने कहा कि कन्या भ्रूण हत्या जैसे जघन्य अपराध को रोकने के लिए केवल कानूनी कार्रवाई ही नहीं, बल्कि समाज की सोच को बदलने की जरूरत है। समाज में बेटियों को बेटों के बराबर सम्मान देने और लिंग आधारित भेदभाव को समाप्त करने के लिए सामाजिक जागरूकता अत्यंत आवश्यक है।
एडीसी सोनू भट्ट वीरवार को नगर परिषद कार्यालय में प्रसव पूर्व लिंग निर्धारण अधिनियम (पीएनडीटी एक्ट) के तहत गठित जिला स्तरीय सलाहकार समिति की बैठक में अधिकारियों को निर्देश दे रहे थे। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि एमटीपी सेंटरों की नियमित रूप से जांच की जाए और उनके रिकॉर्ड रजिस्टर को चेक किया जाए। इसके साथ ही, जिला के सभी अल्ट्रासाउंड सेंटरों का भी समय-समय पर निरीक्षण सुनिश्चित किया जाए ताकि पीएनडीटी अधिनियम का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ तुरंत सख्त कार्रवाई की जा सके।
एडीसी ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों को उन गांवों पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया जहां लिंगानुपात कम है। उन्होंने कहा कि इन क्षेत्रों में आंगनवाड़ी वर्कर्स, एएनएम व आशा वर्कर नियमित बैठकें आयोजित कर लोगों को जागरूक करें। इसके साथ ही सभी गांवों में पंजीकरण रजिस्टर मेंटेन हों तथा उसकी समय-समय पर समीक्षा की जाए।
बैठक में उप सिविल सर्जन डॉ शीनू चौधरी ने बताया कि गत माह जिला का लिंगानुपात 926 था और प्रदेश में जिला का लिंगानुपात के मामले में स्थान पांचवां है। उन्होंने बताया कि पीएनडीटी एक्ट के तहत लगातार एमटीपी सेंटरों व अल्ट्रासाउंड सेंटरों का निरीक्षण किया जा रहा है। पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों और नियमों के उल्लंघन करने पर 5 वर्ष तक की सजा एवं 10 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है तथा नियमों की उल्लंघना करने वालों के खिलाफ गुप्त सूचना देने वाले को एक लाख रुपये तक का इनाम देने का भी एक्ट में प्रावधान किया गया है।
बैठक में जिला न्यायवादी पंकज सैनी, डीएसपी मीना, सीडीपीओ करनाल रजनी सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
