सरकारी एजेंसियां नमी या काले दाने का बहाना बनाकर धान की खरीद से इनकार कर रही हैं। इसके चलते MSP से भी ₹500-800 तक कम रेट पर खरीद हो रही है।
पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए हुड्डा ने कहा कि करनाल में भी किसानों ने यही समस्याएं बताई थी। इसके चलते विरोध जताते हुए किसानों ने मंडी तक बंद कर दी थी। हुड्डा ने अधिकारियों को व्यवस्थाएं दुरुस्त करने का निर्देश दिया।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव से पहले धान का रेट ₹3100 प्रति क्विंटल देने का वादा किया था, लेकिन अब MSP तक नहीं दिया जा रहा।
हुड्डा ने कहा कि सरकार को नमी की मात्रा में 22-24% तक छूट देनी चाहिए और काले दानों की मात्रा में भी राहत देते हुए कम से कम ₹500 प्रति क्विंटल बोनस की घोषणा करनी चाहिए। इस बार भारी बारिश, बाढ़ और जलभराव के कारण किसानों की फसल में 100% तक खराबा हुआ है। जो फसल बची है, उसमें उत्पादन बहुत कम है। सरकार ने मुआवजे के रूप में अधिकतम ₹15,000 प्रति एकड़ की घोषणा की है, जबकि किसानों को ₹60,000 से ₹70,000 प्रति एकड़ का नुकसान हुआ है। खेतों का ठेका भी ₹70,000 प्रति एकड़ से अधिक हो चुका है। ऐसे में सरकार द्वारा ऐलान किया गया मुआवजा, ऊंट के मुंह में जीरे के समान है।
धान खरीद पर कम से कम ₹500 बोनस और नमी में 24% छूट दे सररकार- हुड्डा
सोनिका वधवा
कुरुक्षेत्र। नेता प्रतिपक्ष बनने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने आज प्रदेश की कई मंडियों का दौरा किया। उन्होंने कुरुक्षेत्र अनाज मंडी में पहुंचकर किसानों, मजदूरों और आढ़तियों की समस्याएं सुनीं। किसानों ने बताया कि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से वंचित किया जा रहा है और खरीद के नाम पर खुली लूट हो रही है। मंडी में आने के लिए ना गेट पास बन रहे हैं और ना ही फसल रखने के लिए जगह मिल रही है।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि सरकार ने किसानों को ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल, रजिस्ट्रेशन और गेट पास जैसी अव्यवस्थाओं में उलझाकर रखा है। उठान के कार्य में सुधार के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे, जिसके चलते भुगतान में भी देरी हो रही है। साथ मे अशोक अरोड़ा पूर्व मंत्री ,जिला प्रधान मेवा सिंह आदि सैकड़ों नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
