करनाल, 3 अक्तूबर। कृषि उप- निदेशक डाॅ. वजीर सिंह ने बताया कि फसल कटाई के बाद पराली में आग लगाने की घटनाओं पर पूरी तरह से रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन लगातार अलर्ट मोड़ पर है। इसी क्रम में गत दिवस विजयदशमी के दिन खंड नीलोखेड़ी के विभिन्न गावों में एस.डी.एम. अशोक कुमार की अगुआई में फ्लैग मार्च निकाला गया। उनके साथ डी.एस.पी.नीलोखेड़ी,महाबीर सिंह, कृषि उप-निदेशक
वजीर सिंह, बी.डी.पी.ओ. नीलोखेड़ी, श्री आशुतोष, सहायक पौधा संरक्षण अधिकारी, सुरेश कुमार, खंड कृषि अधिकारी रामपाल, एस.एच.ओ.नीलोखेड़ी,राजपाल सिंह, एस.एच.ओ. निगदू, संदीप सिंह, कृषि विकास अधिकारी जसविंदर सिंह मौजूद रहे । फ्लैग मार्च की शुरुआत नीलोखेड़ी से करके संधीर, सीकरी, बरसालू, समाना बाहू, बड्थल,अन्जन्थली, कमालपुर, जाम्बा, बुखापुरी, हैबतपुर, पतनपूरी, निगदू, बीड-बड़ालवा, कोयर,माजरा रोडान, सीतामाई, कारसा-डोड, व रायसन गाँवो का दौरा किया गया।
एस. डी. एम. नीलोखेड़ी,अशोक कुमार ने किसानो को कहा कि पराली फसल
अवशेष में आगजनी को किसी भी सूरत में बर्दास्त नहीं किया जायेगा। जो भी किसान इन आदेशों की उल्लंघना करेगा उनसे आगजनी की पर्यावर्णीय क्षतिपूर्ति राशि 2 एकड़ से कम भूमि, प्रति घटना तक 5,000 रु.2 एकड़ या उससे अधिक किन्तु 5 एकड़ से कम भूमि, प्रति घटना तक 10,000 रु. व 5 एकड़ से अधिक भूमि तक प्रति घटना 30,000 रु. वसूली जाएगी और साथ ही आगजनी के दोषी किसान के खिलाफ एफआईआर की जायेगी व उसके मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल रिकॉर्ड में रेड
एंट्री की जायेगी।
उन्होंने बताया कि फ्लैग मार्च के दौरान किसानों से अपील की गई कि वे फसल अवशेष प्रबंधन को अपनाएं और पराली में आग लगाने की बजाय उसे अपनी आय का साधन बनायें यह हमारे लिए भी हितकारी है, और पर्यावरण एवं मिट्टी के लिए भी लाभदायक है। धान फसल कटाई उपरांत बचे हुए अवशेषों में आग लगाना एक गंभीर पर्यावरणीय संकट के रूप में उभरा है । जो मानव स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर रहा है। फसल अवशेषों को जलाने से हवा में हानिकारक गैसे फैलती है, जिससे प्रदुषण बढ़ता है। प्रदुषण से सांस लेने में तकलीफ,आँखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य सम्बंधित सम्सयाए हो सकती है। मिट्टी में मौजूद पोषक तत्व नष्ट हो जाते है व सूक्ष्म जीवों और केंचुओ की संख्या कम हो जाति हैं जिससे मिट्टी की उर्वरता घटती है।
एस. डी. एम. अशोक कुमार ने साथ ही ड्यूटी पर लगे सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सख्त आदेश दिए कि वे पराली में आगजनी रोकने के लिए किसी प्रकार की लापरवाही न बरते। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पराली में आग लगाने पर रोक लगाई गई है। इसलिए किसान किसी भी सूरत में पराली में आग न लगाएं, बल्कि सरकार की फसल अवशेष प्रबंधन योजना के तहत दिए जा रहे विभिन्न कृषि यंत्रों के जरिए या तो खेत में ही उनका निष्पादन करें या पराली की गांठें बनाकर उनकी बिक्री करें इससे किसानों को दोहरा लाभ होगा और पर्यावरण दूषित होने से भी बचेगा फ्लैग मार्च के दौरान दो कंबाइन हार्वेस्टर बिना सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के धान की कटाई करते हुए पकडे गए उनको रोक कर जब्त कर लिया गया है, और आगे नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी । जिला में इस वर्ष सभी कंबाइन हार्वेस्टर के मालिको को धान की कटाई करते समय सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम लगाने के लिए नोटिस दिए जा चुके है.। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के निर्देश अनुसार हरियाणा राज्य में धान की पराली जलाने की समस्या तथा पर्यावरण पर इसके प्रतिकूल प्रभाव को ध्यान में रखते हुए, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31-ए के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए, निर्देश जारी किये है कि हरियाणा राज्य में धान की कटाई करने के इच्छुक कंबाइन हार्वेस्टर के मालिक कंबाइन हार्वेस्टर के साथ सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम अवशय लगाएंगे तथा हरियाणा राज्य में किसी भी कंबाइन हार्वेस्टर को सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के बिना धान की कटाई करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
उन्होंने बताया कि उपरोक्त निर्देशों की अनुपालना हेतु जिला में किसी भी कंबाइन हार्वेस्टर को सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के बिना धान की कटाई करने
की अनुमति नहीं दी जाएगी। माननीय उपायुक्त महोदय करनाल द्वारा गठित जिला स्तरीय,खंड तहसील स्तरीय व गाँव स्तरीय कमेटी एन्फोर्सेमेंट टीमे इनका निरिक्षण करेंगी और जो भी कंबाइन हार्वेस्टर जिला करनाल में बिना सुपर स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम के धान की कटाई करते हुए पाया गया तो उस पर नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जायेगी।
कृषि तथा किसान कल्याण विभाग के उपनिदेशक वजीर सिंह ने बताया की जिला में अब तक पराली जलाने के मामले में चारो किसानों पर एफआईआर दर्ज
करवाई जा चुकी है, साथ ही साथ चारो किसानों से नियमानुसार जुर्माना वसूला गया है और उनके मेरी फसल मेरा ब्योरा पोर्टल में रेड एंट्री कर दी गयी है, जिससे ये किसान अगले दो सीजन अपनी फसल एमएसपी पर नहीं बेच पाऐगे।
उन्होंने बताया कि चारो किसान जिला के घरौंडा खंड से संबंधित है, किसान जसमेर निवासी गाँव कैमला पर गांव मलिकपुर के रकबा के खेतों में धान की पराली में आग लगाने पर एफआईआर दर्ज की गई। किसान दिनेश कुमार व सुरजीत निवासी फुरलक व् किसान  विक्की पुत्र राजकुमार निवासी गाँव बीजना पर धान की पराली में आग लगाने पर वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 के अंतर्गत धारा 39 व् भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस),2023 के अंतर्गत धारा 223(ए) के अंतर्गत सम्बंधित थाना में एफआईआर दर्ज करवाई गई है।

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