विजेताओं को डेढ़ लाख से अधिक के पुरस्कार किए गए वितरित
कुरुक्षेत्र। हरियाणा की लोककला सांझी को बचाने के लिए विरासत हेरिटेज विलेज कुरुक्षेत्र द्वारा आयोजित पांचवे सांझी उत्सव में जहां एक ओर 100 से अधिक महिलाओं ने प्रतियोगिता में भाग लिया वहीं पर दूसरी ओर विरासत हेरिटेज विलेज की लोककला सांझी को बचाने की मुुहिम रंग लाई। 21 सितंबर से 1 अक्टूबर 2025 तक चली यह मुहिम सोशल मीडिया के माध्यम से एक करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंची। यह जानकारी कार्यक्रम के संयोजक अभिनव पूनिया ने दी। उन्होंने बताया कि विरासत हेरिटेज विलेज की ओर से आयोजित इस प्रतियोगिता में 1 लाख 71 हजार से अधिक के पुरस्कार वितरिए किए गए। कार्यक्रम का उद्घाटन श्रीमती सुमन सैनी उपाध्यक्ष हरियाणा राज्य बाल विकास परिषद तथा भगत फूलसिंह महिला विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुदेश छिक्कारा एवं एएचए प्रतिनिधि प्रो. दिनेश चहल ने किया। उन्होंने बताया कि 10 दिन तक चले इस सांझी उत्सव को स्कूल के हजारों विद्यार्थियों ने देखा। इसके अतिरिक्त अनेक कला प्रेमियेां तथा लोककला पर पीएचडी करने वाले छात्रों ने सांझी कला की डॉक्यूमेंटेशन की। उन्होंने बताया कि सोशल मीडिया के माध्यम से विरासत हेरिटेज विलेज कुरुक्षेत्र का अभियान रंग लाया। सोशल मीडिया पर 11.5 मीलियन से ज्यादा लोगों ने इसका अवलोकन किया। इस प्रतियोगिता में हरियाणा, पंजाब तथा उत्तर प्रदेश की महिलाओं ने सांझी प्रतियोगिता में भाग लिया।
उन्होंने कहा कि प्रथम पुरस्कार अजरानी कलां कुरुक्षेत्र की मुस्कान को 51 हजार रूपये, दूसरा पुरस्कार कृष्णा कॉलोनी हांसी की प्रतिभागिता मिनाक्षी को 31 हजार रूपये, बिहोली पानीपत की नीतू को 21 हजार रूपये वहीं प्रतियोगिता में 11 हजार रूपये के 2 पुरस्कार सुखविन्द्र कौर और निशा को वितरित किए गए। वहीं 51 सौ के 3 पुरस्कार माया देवी, राधा एवं सुषमा जोशी को प्राप्त हुए। उन्होंने कहा कि 31 सौ के 5 पुरस्कार अन्नू, राजमीत कौर, किरन, नंदनी एवं सुनीता देवी को मिले। 21 सौ के 5 पुरस्कार अनीता, प्रीति, शांति, रिया एवं रीमा को मिले। अभिनव ने बताया कि 11 सौ के पांच पुरस्कार रमा, मिनाक्षी, निर्मला राठी, निशा, निवेदिता को प्राप्त हुए।
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हरियाणा की लोककला को बचाने के लिए कॉरपोरेट सेक्टर को आगे आना चाहिए: डॉ. महासिंह पूनिया
हरियाणवी संस्कृति प्रेमी डॉ. महासिंह पूनिया ने कहा कि हरियाणा की अनेक लोककलाएं दम तोड़ रही हैं। इनके संरक्षण के लिए हरियाणा के औद्योगिक घरानों, बुद्धिजीवियों तथा सामाजिक संस्थाओं को आगे आना चाहिए ताकि हरियाणा की लुप्त होती लोक संस्कृति को संरक्षित कर युवा पीढ़ी से जोड़ा जा सके। उन्होंने बताया कि सांझी जैसी कला जो सदियों पुरानी है धीरे-धीरे लुप्त हो रही है। आवश्यकता है इस कला को बाजार से जोड़ कर इसमें कलाकारों के लिए रोजगार के नये अवसर पैदा करने की। आने वाले दिनों में इस अभियान के सार्थक परिणाम आ सकते हैं।
