चंडीगढ़। हरियाणा में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश के 25 पदों पर की जा रही भर्ती में एक उम्मीदवार की दावेदारी एक मामूली गलती के चलते समाप्त हो गई। याचिकाकर्ता वकील प्रदीप कुमार ने अपने आवेदन पत्र में गलती से यह घोषित कर दिया था कि उनकी एक से अधिक पत्नियां हैं।

इसी आधार पर उनकी उम्मीदवारी रद कर दी गई। याचिकाकर्ता ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में राहत की मांग करते हुए परीक्षा में बैठने की अनुमति मांगी, लेकिन कोर्ट ने उनकी दलील खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति संजीव बेरी की खंडपीठ ने कहा कि आवेदन पत्र उम्मीदवार की अपनी जिम्मेदारी है और उसमें हुई गलती के लिए वह स्वयं उत्तरदायी है।

अदालत ने स्पष्ट किया कि भर्ती अधिसूचना के अनुसार, एक से अधिक जीवनसाथी रखने वाला उम्मीदवार जिला न्यायिक सेवा के लिए पात्र नहीं है। आवेदन पत्र में इस संबंध में स्पष्ट विकल्प था, जिसमें याचिकाकर्ता ने “हां” लिख दिया था।

कोर्ट ने कहा कि “आप स्वयं कह रहे हैं कि आपकी दो पत्नियां हैं। उन्हें कैसे पता कि आपकी एक है, दो हैं या तीन ?” अदालत ने आगे टिप्पणी की कि प्रतियोगी परीक्षाएं समयबद्ध और जटिल होती हैं, यदि बार-बार आवेदन में संशोधन की अनुमति दी गई तो भर्तियां पूरी ही नहीं होंगी।

इसलिए आवेदन भरते समय अत्यधिक सावधानी बरतना जरूरी है, क्योंकि छोटी सी गलती भी उम्मीदवार की उम्मीदवारी समाप्त कर सकती है।

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