सीटीएम मोनिका शर्मा तथा एडीए आरती वशिष्ठ ने लिया एक-एक टीबी मरीज को गोद
करनाल, 12 सितंबर। सिविल सर्जन डॉ पूनम चौधरी ने बताया कि टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत निक्षय मित्र योजना चलाई जा रही है। इसके तहत शुक्रवार को गणमान्य व्यक्तियों व संस्थाओं द्वारा 64 टीबी मरीजों को गोद लेकर उन्हें पोषण सामग्री वितरित की गई।
उन्होंने बताया कि सीटीएम मोनिका शर्मा द्वारा एक, एडीए आरती वशिष्ठ द्वारा एक, अग्रवाल सभा सेक्टर-7 के प्रेसिडेंट नीरज अग्रवाल द्वारा 11, सरकारी कर्मचारी फार्मेसी एसोसिएशन के प्रेसिडेंट राजेश सिंगला द्वारा 10, सेल्स टैक्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट भीम सिंह द्वारा 5, पवनांजलि अस्पताल पानीपत से डा0 अंजलि बंसल द्वारा 20, रोक्स जिम सैक्टर-4 के मालिक मनोज द्वारा 10 तथा डा0 मोनिका सिंघी द्वारा 6 टी0बी0 के मरीजों को गोद लिया गया और उन्हें पोषण सामग्री वितरित की गई।
सिविल सर्जन ने बताया कि इस समय करनाल जिले में 2700 टी0बी0 के मरीजों का इलाज चल रहा है जिनको गोद लेकर प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ वितरित किये जाने हैं, जिसके लिए समाजसेवी संस्थाओं से अपील है कि वह इस मुहिम में अपना योगदान दें ताकि टी0बी0 मुक्त भारत के लक्ष्य को पूरा किया जा सके। भारत में विश्व के सबसे अधिक टीबी के मरीज हैं। यदि किसी व्यक्ति में टीबी के लक्षण पाए जाते हैं तो वह नजदीक स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर जांच व ईलाज करवाएं। सभी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्रों पर टीबी से सम्बंधित जांच व इलाज मुफ्त किया जाता है। इसलिए मरीजों को जागरूक करना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा टीबी को नोटिफाइबल डिजीज घोषित किया गया है, जिसके अंतर्गत सभी प्राइवेट अस्पताल/क्लीनिक एवं लैब को टीबी के केस को रिपोर्ट करना आवश्यक है।
उप-सिविल सर्जन (टीबी) डॉ. सिम्मी कपूर द्वारा बताया गया कि टी.बी. एक संक्रामक रोग है जो शरीर के किसी भी अंग में हो सकती है, मगर मुख्यत: यह फेफड़ों को प्रभावित करती है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने एवं थूकने से फैलती है। यदि समय पर जांच एवं इलाज शुरू न किया जाये तो एक टीबी का मरीज 10-15 व्यक्तियों को टीबी की बीमारी दे सकता है। उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा टीबी उन्मूलन के लिए वर्ष 2025 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिला करनाल में 9 क्षय रोग केन्द्र हैं तथा 23 जगह बलगम के जांच केन्द्र हैं जहां पर मरीजों के बलगम की निशुल्क जांच की जाती है । भारत सरकार द्वारा निक्षय पोषण योजना के अन्तर्गत टीबी मरीजों को पोषण हेतु 1000/- रुपये प्रतिमाह देने का प्रावधान किया गया है । एनटीईपी के अन्तर्गत नये टीबी मरीजों की सूचना देने तथा उनकी बलगम की जांच करवाने उपरान्त टीबी पाये जाने पर सूचना देने वाले को 500/- रुपये प्रति मरीज देने का प्रावधान है।
