चंडीगढ़। हाई कोर्ट ने कहा है कि नशे की हालत में किसी सैनिक की दूसरे सैनिक के साथ हुई मारपीट से मौत के मामले में मृतक के परिवार को उदारीकृत पारिवारिक पेंशन योजना के तहत लाभ नहीं दिए जा सकते।

जस्टिस हरसिमरन सिंह सेठी और जस्टिस विकास सूरी की खंडपीठ ने सैनिक की मौत को चरमपंथियों और असामाजिक तत्वों आदि द्वारा कार्रवाई के अंतर्गत शामिल करने से इंकार करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के पति और एक अन्य सहकर्मी के बीच शराब पीने के बाद झगड़ा हुआ था, जिस दौरान सहकर्मी ने उसे गोली मार दी, जिसके परिणामस्वरूप मृत्यु हो गई।

यह याचिका भिवानी निवासी मृतक सैनिक की विधवा मुकेशवती द्वारा दायर की गई थी, जिसमें सशस्त्र बल न्यायाधिकरण की क्षेत्रीय पीठ चंडीगढ़ (एएफटी) द्वारा पारित आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसके तहत याचिकाकर्ता को उदारीकृत पारिवारिक पेंशन का लाभ नहीं दिया गया था।

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि यद्यपि याचिकाकर्ता को विशेष पारिवारिक पेंशन का लाभ पहले ही दिया जा चुका है। याचिका का विरोध करते हुए केंद्र सरकार ने कहा कि विशेष पारिवारिक पेंशन का लाभ याचिकाकर्ता को पहले ही प्रदान किया जा चुका है, लेकिन उदारीकृत पारिवारिक पेंशन का लाभ केवल उस स्थिति में दिया जा सकता है।

याचिकाकर्ता के दिवंगत पति की मृत्यु एक सहकर्मी के हाथों हुई थी, जब वह एक इकाई में तैनात थे, न कि किसी युद्ध या आपरेशन के दौरान यह सब हुआ। दलील सुनने के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि जब याचिकाकर्ता को पहले ही विशेष पारिवारिक पेंशन का लाभ दिया जा चुका है तो जिन परिस्थितियों में याचिकाकर्ता के पति की मृत्यु हुई, उसे उस खंड (जी) के अंतर्गत नहीं माना जा सकता, ताकि उसे उदारीकृत पारिवारिक पेंशन का लाभ दिया जा सके, जैसा कि वह दावा कर रही है। खंड (जी) उन सैनिकों को उदारीकृत पारिवारिक पेंशन का हकदार बनाता है जो उग्रवादियों, असामाजिक तत्वों आदि द्वारा हिंसा/हमले के कारण मर जाते हैं।

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