पटवारी और ग्राम सचिव 24 घंटे अपने-अपने गांवों में ही रहकर करेंगे रिपोर्ट,कंट्रोल नंबर 01744-221035 रहेगा 24 घंटे एक्टिव,जरुरत पडऩे पर की जाएगी स्कूलों की छुट्ïटी और ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर आवेदन के लिए लगाएंगे स्पेशल कैंप
कुरुक्षेत्र, 1 सितंबर। उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि जलभराव की स्थिति को समय से नियंत्रित रखने के लिए प्रशासन योजनाबद्ध तरीके से काम कर रहा है। पटवारी और ग्राम सचिव को 24 घंटे गांवों में ही रहते हुए ग्रामीणों और जिला प्रशासन के बीच की कड़ी का काम कर रहे हैं। सभी गांवों में रात के समय ठीकरी पहरा लगाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रशासन हर स्थिति से निपटने के लिए तैयार है। जिला में स्थिति नियंत्रण में है। जिलावासियों को पैनिक होने की जरुरत नहीं है। किसी भी जानकारी को कंट्रोल रूम नंबर 01744-221035 पर किसी भी समय पर दे सकते हैं।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि हिमाचल व उत्तरी क्षेत्र में हो रही बारिश के कारण मारकंडा नदी का जलस्तर बढ़ा हुआ है। सुबह करीब 42 हजार क्यूसेक पानी का बहना दर्ज किया गया। झांसा में भी नदी की स्थिति हाई फल्ड लेवल पर चल रही है। उन्होंने कहा कि जिले के गांव गोमती, मलिकपुर, तंगोर, कठवा को दौरा कर स्थिति को जाना गया है। गांव कठवा में सडक़ पर कट लगाकर पानी को पार करवाया जा रहा है।
उपायुक्त ने कहा कि गांवों में यवस्था के लिए अधिकारियों की टीम नियुक्त की गई है। फिलहाल जिला में स्थिति नियंत्रण में है, किसी भी नागरिक को पैनिक होने की जरुरत नहीं है। जिला में कंट्रोल रूम 24 घंटे चल रहा है। साथ ही अधिकारियों का व्हाटसअप ग्रुप बनाया हुआ है। उन्होंने कहा कि नागरिकों से आग्रह है कि वो बिना कारण घर से बाहर ना निकलें। जरुरी होने पर पानी की स्थिति का पता करने के बाद ही बाहर जाएं। एसडीआरएफ को एतिहात के तौर पर झांसा व शाहाबाद एरिया में मदद के लिए लगाया गया है।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि 13 अगस्त व 14 अगस्त को हुई बारिश के बाद ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल खोला गया था। इस पोर्टल में जिले के बरसात से प्रभावित 75 गांवों को शामिल किया हुआ है। मौजूदा जलभराव की स्थिति से यदि इनके अतिरिक्त कोई गांव प्रभावित होता है तो उसका भी पोर्टल में शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यदि किसान किसी कारण से पोर्टल पर आवेदन नहीं कर पा रहे हैं तो उन गांवों में प्रशासन की तरफ से स्पेशल कैंप का आयोजन किया जाएगा। इस पोर्टल पर ग्रामीण अपनी किसी भी प्रकार की हानि का आवेदन कर सकते हैं।

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