चंडीगढ़।  हरियाणा विधानसभा के मानसून सत्र से ठीक पहले तक उम्मीद की जा रही थी कि कांग्रेस अपने विधायक दल के नेता का नाम घोषित कर देगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। नतीजतन लग रहा था कि कांग्रेस के तेवर काफी बुझे-बुझे होंगे।

यह धारणा उस समय पूरी तरह से गलत निकली, जब विधायक दल के नेता की घोषणा के बिना भी विधानसभा में कांग्रेस पूरे दमखम के साथ सरकार से टकराती नजर आई। आधार बनाया गया राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति पर काम रोको प्रस्ताव को, जिसे स्वीकार कराने के लिए कांग्रेस विधायक पूरे तीन घंटे तक सरकार से टकराते रहे।

आखिरकार उन्हें सफलता मिली और सरकार ने भी टकराव का रास्ता छोड़कर कांग्रेस विधायकों के काम रोको प्रस्ताव को चर्चा के लिए स्वीकार कर लिया। कांग्रेस विधायकों के शोरगुल और जोशीले अंदाज को देखकर स्पीकर हरविन्द्र कल्याण ने एक बार उन्हें छेड़ा भी।

कल्याण ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से स्थिति को संभालने का आग्रह करते हुए कहा कि आप विपक्ष के नेता भी नहीं हैं, लेकिन हम फिर भी आपको विपक्ष के नेता की तरह मान-सम्मान दे रहे हैं। इस पर भूपेंद्र हुड्डा ने खड़े होकर सफाई दी कि मैं सदन का नेता रह चुका हूं, विपक्ष का नेता भी रहा हूं, इसलिए विपक्ष के नेता का पद मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता।

विधानसभा में हुड्डा के इस कथन के बाद सारे कांग्रेस विधायक ठीक उसी भाव में नजर आ रहे थे, जिसमें हुड्डा उनके नेता हैं। युवा विधायक विकास सहारण, जस्सी पेटवाड, इंदुराज नरवाल, गीता भुक्कल, पूजा चौधरी, बलराम दांगी, शकुंतला खटक और आदित्य सुरजेवाला ने जिस तरह से बार-बार मोर्चा संभाला, वह कांग्रेस के लिए सुखद संकेत कहा जा सकता है।
बुजुर्ग विधायक मोहम्मद इलियास को पकड़कर उनका सहायक सदन में लेकर आया था। एक रूप यह था तो दूसरा रूप यह था कि युवा विधायक स्पीकर की किसी चेतावनी को मानने को तैयार नहीं हुए और उन्हें अड़कर कई बार वेल में प्रदर्शन किया। यही युवा विधायक कांग्रेस को आज सदन में मजबूती व जोशीले रूप में पेश करते हुए दिखाई पड़े हैं।

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