कुरुक्षेत्र, 20 अगस्त। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के आदेशानुसार जियोफिजिक्स विभाग के प्रोफेसर दिनेश कुमार ने डीन फैकल्टी ऑफ सांइसिज का कार्यभार विधिवत् रूप से संभाला। इस अवसर पर निवर्तमान डीन प्रो. संजीव अरोड़ा ने प्रो. दिनेश कुमार को कार्यभार सौंपा। यह जानकारी लोक सम्पर्क विभाग के निदेशक प्रो. महासिंह पूनिया ने दी।
उन्होंने बताया कि इसके साथ ही प्रो. दिनेश कुमार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कोर्ट तथा एकेडमिक काउंसिल के सदस्य भी होंगे। इस अवसर पर छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. ए. आर. चौधरी, प्रो. संजीव अरोड़ा, प्रो. जी. पी. दुबे, प्रो. विनोद कुमार, डॉ. नरेश, डॉ. आर. बी. एस. यादव, डॉ. मनीषा संधू, डॉ. सोहन लाल और डॉ. अतुल उपस्थित थे।
शिक्षण संस्थानों में कर्मचारियों का यौन उत्पीड़न से बचने के लिए जागरुक होना ज़रूरीः प्रो. मंजूला चौधरी
कुवि में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न पर कार्यशाला
कुरुक्षेत्र, 20 अगस्त। शिक्षक संस्थानों में कर्मचारियों का यौन उत्पीड़न से बचने के लिए जागरुक होना बहुत ही ज़रूरी है। यौन उत्पीड़न का अर्थ किसी को फिजीकल छूना नहीं होता कार्यस्थल पर कार्य करते समय असहज महसूस करना भी यौन उत्पीड़न हो सकता है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपने कार्यस्थल पर किसी का दबाव सहन न करें। दबाव देना, फब्तियां कसना, अश्लील इशारे करना यौन अपराध की श्रेणी में आता है । कार्य स्थल पर कार्य करते हुए मौखिक शब्दों पर ध्यान देना ज़रूरी है। यह विचार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की दूरस्थ एवं आनलाइन शिक्षा केन्द्र की निदेशक प्रो. मंजूला चौधरी ने बतौर मुख्यातिथि बुधवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयूके) के प्रशिक्षण, योजना और निगरानी प्रकोष्ठ (टीपीएमसी) तथा आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के संयुक्त तत्वावधान में “कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013” विषय पर केयू में कार्यरत लिपिकों के लिए डॉ. आर.के.सदन में आयोजित कार्यशाला में व्यक्त किए। इससे पहले दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया किया गया। कुवि की आंतरिक शिकायत समिति की अध्यक्ष प्रो. सुनीता सिरोहा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया।
प्रो. मंजूला चौधरी ने पोश अधिनियम के बारे में जागरूक किया। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में भी यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) का उल्लेख किया गया है। आज के परिप्रेक्ष्य में हमें महिलाओं के प्रति अपनी सोच बदलने की जरूरत है। कार्यस्थल व समाज में महिलाओं के व्यवहार में मिथक धारणाएँ देखी जाती है इन धारणाओं के कारण महिलाओं का शोषण निरंतर होता रहता है। जेंडर गेप को कम करने के लिए आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करना जरूरी है।
केयू आईसीसी की अध्यक्ष प्रो. सुनीता सिरोहा ने प्रतिभागियों को इंटरनल कंप्लेंट कमेटी की कार्य प्रणाली के बारे में बताया जो विश्वविद्यालय को लैंगिक शोषण मुक्त परिसर बनाने में सदा कार्यरत रही है। उन्होंने कर्मचारियों को स्पष्ट किया कि यदि कोई शिकायत किसी भी स्तर पर गलत या झूठी पाई जाती है जो शिकायतकर्ता के विरूद्ध भी कार्यवाही करने का प्रावधान है।
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय (केयूके) के प्रशिक्षण, योजना और निगरानी प्रकोष्ठ (टीपीएमसी) के नोडल आफिसर व परीक्षा नियंत्रक डॉ. अंकेश्वर प्रकाश ने सभी अतिथियों का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा हमें अपने व्यवहार को नियमित चौक करना आवश्यक है ताकि हमें पता चल सके हमें कब, कहां और किसे क्या कहना है। मंच का संचालन नितिन ने किया।
इस अवसर पर मीनाक्षी, सुनील कुमार, राहुल सहित कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रतिभागी लिपिक मौजूद थे।
नशा एक मानसिक विकारः डॉ. नंदिनी मौदगिल
व्यक्तित्व विचार, मूल्य, दृष्टिकोण और आंतरिक भावनाओं का सम्मिलित रूपः डॉ. सलोनी पवन दिवान
इंडक्शन कार्यक्रम में विद्यार्थियों को नशे के प्रति किया जागरूक
कुरुक्षेत्र, 20 अगस्त। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में यूआईईटी संस्थान में इंडक्शन कार्यक्रम के के तहत “इंटरनेट दुरुपयोग और नशे की लत” विषय पर पहला सत्र आयोजित किया गया। मुख्य वक्ता डॉ. नंदिनी मौदगिल सहायक प्राध्यापक, मनोविज्ञान, जी.सी.डब्ल्यू. शाहजादपुर ने युवाओं में बढ़ते इंटरनेट दुरुपयोग और नशे की लत को गंभीर चुनौती बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शराब और तंबाकू जैसे वैध तथा कोकीन और हेरोइन जैसे अवैध नशे शरीर के कई अंगों को प्रभावित कर घातक रोग उत्पन्न करते हैं। उन्होंने यह भी समझाया कि नशा एक मानसिक विकार है, जो धीरे-धीरे निर्भरता औरवापसी लक्षणों का कारण बनता है। उन्होंने “वोरी ट्री पद्धति” और “पॉज़िटिव-नेगेटिव चार्ट” जैसी व्यावहारिक तकनीकों को अपनाने की सलाह दी, जो आत्मचिंतन और सकारात्मक जीवन शैली की ओर प्रेरित करती हैं। संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील ढींगरा ने सभी अतिथियों का स्वागत व अभिनंदन किया।
दूसरे सत्र में “पर्सनैलिटी डेवलपमेंट” विषय पर मुख्य वक्ता युवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम विभाग की उप-निदेशक डॉ. सलोनी पवन दिवान ने बताया कि व्यक्तित्व केवल बाहरी रूप या बोलचाल नहीं, बल्कि विचार, मूल्य, दृष्टिकोण और आंतरिक भावनाओं का सम्मिलित रूप है। उन्होंने आइसबर्ग सिद्धांत का उदाहरण देते हुए समझाया कि व्यक्तित्व का अधिकांश भाग अवचेतन मन में छिपा होता है। इस अवसर पर संस्थान के निदेशक प्रो. सुनील ढींगरा, डॉ. उर्मिला, शिखा चौधरी, डॉ सविता, डॉ दीप्ति सहित संस्थान के शिक्षक, विद्यार्थी व कर्मचारी मौजूद थे।
छात्रों को ललित कला में प्रयुक्त सामग्रियों की दी जानकारी
कुरुक्षेत्र, 20 अगस्त। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सोमनाथ सचदेवा के मार्गदर्शन में ललित कला विभाग द्वारा रंगों के पीछे का विज्ञान विषय पर दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रथम दिन सत्र का संचालन कैमल के क्षेत्रीय प्रचार प्रबंधक कमल सेठ ने किया, जिन्होंने छात्रों को रंगों के विज्ञान, ललित कला में प्रयुक्त सामग्रियों से परिचित कराया और कैमल ललित कला के नए लॉन्च किए गए गुणवत्तापूर्ण उत्पादों पर प्रकाश डाला। इस सत्र ने छात्रों को सामग्री के उचित उपयोग और उनके अभ्यास में आवश्यक सावधानियों के बारे में बहुमूल्य जानकारी प्राप्त करने में मदद की। कार्यक्रम का उद्घाटन ललित कला विभाग के अध्यक्ष डॉ. गुरचरण सिंह के स्वागत भाषण के साथ हुआ, जिन्होंने विशेषज्ञ का परिचय दिया और अकादमिक चर्चा का आधार तैयार किया।
दूसरे सत्र में कमल सेठ द्वारा एक व्यावहारिक प्रदर्शन सत्र आयोजित किया गया, जिसमें 40 से अधिक छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और कैमल फाइन आर्ट द्वारा प्रदान की गई कला सामग्री पर काम किया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम की छात्रों और शिक्षकों दोनों ने अत्यधिक सराहना की, क्योंकि इसने सैद्धांतिक और व्यावहारिक, दोनों तरह के शिक्षण अनुभव प्रदान किए, जिससे ललित कला के छात्रों के शैक्षणिक और रचनात्मक विकास में महत्वपूर्ण योगदान मिला।
