जी.एम.एन कॉलेज, अंबाला कैंट हिंदी विभाग एवं भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के द्वारा आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी को याद करते हुए कॉलेज परिसर में विद्यार्थियों को भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध एवं उज्ज्जवल परंपरा से परिचित करवाने के लिए भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया गया|  कॉलेज प्राचार्य डॉ. रोहित दत्त ने बताया  कि आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी भारतीय संस्कृति के श्रेष्ठ गायक है | भारतीय योग ,साहित्य इतिहास ,मूल्य,अनुशासन  अन्य देशों में दुर्लभ है |प्रकृति के प्रति संवेदनशील होना भारतीय ज्ञान परंपरा की समृद्ध विरासत है|  विद्यार्थियों ने अपने भाषण में भारतीय योग, गुरु शिष्य परंपरा ,वेदों के महत्व पर अपने विचार प्रकट किए | प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. अनीश कुमार ने बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व बंधुत्व की वाहक है | सर्व के हित की कामना भारतीय ज्ञान परंपरा ही करती है|  आज विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक चरित्रों के द्वारा अपनी बात को रखा | भौतिकवाद के युग में विद्यार्थियों को अपनी जड़ों से जोड़ना भारतीय ज्ञान परंपरा की प्रमुख देन है |  विद्यार्थियों ने अपने भाषण में बताया कि उच्च आचरण, शास्त्र सम्मत जीवन जीना ,नीति की पगडंडियों पर चलना व्यक्ति के व्यक्तित्व को परिष्कृत करता है |जहां गुरु शिष्य परंपरा की बात करते विद्यार्थियों ने रामचरितमानस, महाभारत से उदाहरण प्रस्तुत कर अपनी बात को जोर देखकर रखा वही योग की विभिन्न क्रियाओं को विद्यार्थियों ने भाषण के माध्यम से स्पष्ट किया | इस अवसर पर निर्णायक मंडल के रूप में डॉ. रितु गुप्ता वर्तमान रही |भाषण प्रतियोगिता में डॉ. राजेंद्र देशवाल, प्रो.प्रियंका , प्रो. हर्षिता , प्रो.मीरवाल की विशेष भूमिका रही।

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