पंचकूला। हरियाणा में सड़कों और सार्वजनिक स्थलों पर भीख मांगने वाले बच्चों का पुनर्वास किया जाएगा।

पंजाब के बाद हरियाणा सरकार ने अपने राज्य में अब बाल भिक्षावृत्ति को रोकने के लिए रोडमैप तैयार कर लिया है। पुलिस, बाल संरक्षण, स्वास्थ्य, श्रम और सामाजिक कल्याण विभाग मिलकर भिक्षावृत्ति पर रोक लगाएंगे।

महिला एवं बाल विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने प्रदेश में संगठित बाल भिक्षावृत्ति पर संज्ञान लेते हुए बृहस्पतिवार को राज्यस्तरीय अंतर-विभागीय बैठक बुलाई।

इसमें संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बाल भिक्षावृत्ति के मूल कारणों को समाप्त करने और इसे जड़ से मिटाने के लिए रोडमैप तैयार किया गया।

हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने केंद्र सरकार की स्माइल योजना के तहत राज्य समर्थित बचाव और पुनर्वास पहल शुरू कर दी है।

बैठक में बताया गया कि बाल भिक्षावृत्ति केवल गरीबी का परिणाम नहीं है। कई मामलों में यह एक संगठित आपराधिक पेशा बनकर उभरा है, जिसमें बच्चों को गिरोहों, मानव तस्करों या यहां तक कि रिश्तेदारों द्वारा पैसों के लिए सड़कों पर भीख मांगने के लिए मजबूर किया जाता है।

भिक्षावृत्ति बच्चों को शिक्षा से वंचित करता है और उनक शोषण भी होता है और उन्हें जीवन भर असुरक्षा के चक्र में फंसा देती है। कई शहरों में भिक्षावृत्ति एक सुव्यवस्थित रैकेट के रूप में चलती है, जिसमें बच्चों का आय के स्रोत के रूप में शोषण होता है।

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