चंडीगढ़। हरियाणा में कांग्रेस जिलाध्यक्षों की नियुक्तियों के बाद अब विधायक दल के नेता और प्रदेश अध्यक्ष के नाम पर सबकी निगाह टिक गई है। हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र 22 अगस्त से आरंभ हो रहा है, जिसके 26 अगस्त तक चलने की संभावना है।

उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस हाईकमान विधानसभा के मानसून सत्र से पहले विधायक दल के नेता नाम घोषित कर देगी। पिछले 10 माह में विधानसभा के जितने भी सत्र चले, वह सभी विपक्ष के नेता के बिना संचालित हुए। कांग्रेस चूंकि सबसे बड़ा विपक्षी दल है, ऐसे में कांग्रेस विधायक दल का नेता ही विधानसभा में विपक्ष का नेता होगा।

विधानसभा के सत्र विपक्ष के नेता के बिना चलने पर कांग्रेस विधायकों की सदन के भीतर और बाहर दोनों जगह खूब किरकिरी हुई। कांग्रेस हाईकमान पर विधायक दल के नेता का नाम घोषित करने का काफी दबाव रहा, लेकिन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने पहले कांग्रेस का संगठन बनाने की पहल की। उसके बाद ही अब विधायक दल के नेता और प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय किया जाएगा।

हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद ने भी विधानसभा के मानसून सत्र से पहले विधायक दल के नेता का नाम घोषित कर दिए जाने के संकेत दिए हैं। कांग्रेस के 32 जिलाध्यक्षों में जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कांग्रेस महासचिव कुमारी सैलजा के समर्थकों की संख्या सबसे अधिक है, उसे देखकर लग रहा है कि इन दोनों नेताओं के बीच ही विधायक दल के नेता और प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी का फैसला होने की संभावना है।

कांग्रेस के 32 जिलाध्यक्षों में करीब डेढ़ दर्ज भूपेंद्र सिंह हुड्डा के समर्थक और एक दर्जन जिलाध्यक्ष सैलजा समर्थक बताए जा रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री बीरेंद्र सिंह के समर्थक किसी कार्यकर्ता अथवा नेता को जिला प्रधान नहीं बनाया गया है।

कांग्रेस महासचिव रणदीप सुरजेवाला और कैप्टन अजय यादव समर्थक दो-दो जिलाध्यक्ष नियुक्त हुए हैं, जबकि कांग्रेस नेता अशोक तंवर को भी संगठन में बीरेंद्र सिंह की तरह कोई अहमियत नहीं मिली है। हरियाणा कांग्रेस के जिलाध्यक्षों की इस सूची के बाद चर्चा है कि कार्यकारी जिला प्रधान भी बनाए जा सकते हैं।

इनकी सूची अलग से जारी हो सकती है, लेकिन पार्टी के जिलाध्यक्षों को दो दिन का प्रशिक्षण देने के बाद उन्हें जिला पदाधिकारियों व कार्यकारिणी सदस्यों के साथ ब्लॉक प्रधानों की सूची तैयार करने का टास्क दिया जाएगा।

इस टास्क के पूरा होने से पहले विधायक दल के नेता के नाम के लिए कांग्रेस हाईकमान के पास जबरदस्त लॉबिंग चलेगी। जिलाध्यक्षों की घोषणा करते समय कांग्रेस हाईकमान ने गैर जाट राजनीति के समीकरणों को अधिक अहमियत दी है। जाट बाहुल्य क्षेत्रों में गैर जाट जिलाध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं।

ओबीसी जिलाध्यक्षों की संख्या सबसे अधिक है, जिस कारण लग रहा है कि विधायक दल के नेता व प्रदेश अध्यक्ष के पद पर भी जातीय समीकरणों का पूरा ध्यान रखा जाने वाला है।

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