-कुलपति और कुलसचिव ने मिठाई खिला दी शुभकामनाएं, बोले- यह हरियाणा के लिए गौरव का पल
कुरुक्षेत्र, 14 अगस्त। अस्पतालों में इलाज के लिए तरसते लोगों की भीड़ देखकर मन में ठान लिया था कि एक दिन सफेद कोट पहनकर उनकी सेवा करनी है। डॉक्टर बनकर सपना तो पूरा हुआ, मगर दिल में एक और मंजिल बाकी थी यूपीएससी। वर्षों की मेहनत और संघर्ष के बाद बुधवार शाम जब संघ लोक सेवा आयोग के परिणाम में आयुर्वेदिक मेडिकल ऑफिसर (AMO) के रूप में चयन हुआ, तो श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के काय चिकित्सा विभाग के स्नातकोत्तर अंतिम वर्ष के शोधार्थी डॉ. हिमांशु भूषण प्रधान की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। डॉ. हिमांशु मूलरूप से ओडिशा राज्य के बालेश्वर जिला के गांव गोपीनाथपुर,नीलगिरी के रहने वाले हैं।डॉ.हिमांशु की इस उपलब्धि पर श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.वैद्य करतार सिंह धीमान,कुलसचिव प्रो. ब्रिजेंद्र सिंह तोमर, आयुर्वेद अध्ययन एवं अनुसंधान संस्थान के प्राचार्य प्रो. आशीष मेहता, आयुर्वेदिक अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. राजा सिंगला, काय चिकित्सा विभाग की चेयरपर्सन प्रो. नीलम, एसोसिएट प्रो. नेहा लांबा, सहायक प्रो. प्रीति गहलावत समेत संस्थान के अन्य शिक्षकों ने मिठाई खिलाकर शुभकामनाएं दी।
ओडिशा लोक सेवा आयोग में भी AMO चयनित
डॉ. हिमांशु ने 2014 में 12वीं (मेडिकल) उत्तीर्ण की। 2016 में नीट परीक्षा पास कर राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल (बलांगीर) ओडिशा में बीएएमएस में दाखिला लिया, जहां वे सेकेंड टॉपर रहे।स्नातकोत्तर के लिए उन्होंने ऑल इंडिया आयुष पीजी प्रवेश परीक्षा में 316वीं रैंक हासिल कर श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र में काय चिकित्सा विभाग में प्रवेश लिया। पढ़ाई के दौरान ही 2024 में ओडिशा लोक सेवा आयोग में भी बतौर आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी चयनित हुए। शैक्षणिक उपलब्धियों के साथ-साथ डॉ. हिमांशु ने अन्य क्षेत्रों में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वे विभाग में टॉपर रहे, तमिलनाडु के कोयंबटूर में आयोजित राष्ट्रीय क्विज प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त किया और 2022 में हिमाचल कंपनी की ओर से ‘आयुर्वेद विशारद अवार्ड’ से सम्मानित किए गए।
हिमांशु बोले-परिजन मेरी बैकबोन
अपने चयन का श्रेय परिवार को देते हुए डॉ. हिमांशु ने कहा कि मेरे माता-पिता और बहनें मेरी बैकबोन हैं। रिजल्ट आने के बाद जब मैंने उन्हें कॉल किया, तो सभी की आंखों में खुशी के आंसू थे। उनके पिता योगेश्वर प्रधान और माता लक्ष्मी प्रिया ओडिशा गांव में रहते हैं। उनके पिता उत्तकल ग्रामीण बैंक से प्रबंधक सेवानिवृत्त हैं। बड़ी बहन मधुसमिता और सुचिसमिता शादीशुदा है। डॉ.हिमांशु बताते हैं कि किसी मंजिल को हासिल करने के लिए दृढ़ निश्चय बेहद जरूरी है। उन्होंने बिना किसी कोचिंग के ये परीक्षा उत्तीर्ण की है।
आयुष विवि के लिए गर्व का क्षण: कुलपति प्रो. धीमान
कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि डॉ. हिमांशु की उपलब्धि न केवल श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है, बल्कि यह आयुर्वेद के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि और समर्पण का भी प्रमाण है। उन्होंने कहा कि मेहनत, लगन और सकारात्मक दृष्टिकोण से कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं है। हिमांशु ने साबित किया है कि आत्मविश्वास और सतत प्रयास से बिना कोचिंग के भी राष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की जा सकती है। कुलपति ने उम्मीद जताई कि भविष्य में भी विश्वविद्यालय के छात्र ऐसे ही देशभर में विश्वविद्यालय का नाम रोशन करते रहेंगे।