करनाल 30 जुलाई। सिविल सर्जन करनाल डॉ. पूनम चौधरी ने बताया कि 1 से 7 अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि शिशु के जन्म के तुरंत बाद स्तनपान अवश्य शुरू करें और कोशिश करें कि जन्म के प्रथम घंटे में ही बच्चों को स्तनपान मिल जाए। मां का पहला गाढ़ा पीला दूध जिसे कोलोस्ट्रम भी कहते हैं नवजात जन्मे शिशु को कई जानलेवा बीमारियों से बचाता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता विकसित करता है। जन्म से 6 माह तक नवजात शिशु को केवल माता का दूध ही दिया जाना चाहिए। पहले 6 माह तक केवल स्तनपान करवाये पानी भी ना दे।
उन्होंने बताया गया कि मां का दूध ही शिशु के लिए एक संपूर्ण आहार है। 6 माह पूरे होने के बाद स्तनपान जारी रखें व साथ में अन्य आहार को घर में शुरू करें। स्तनपान शिशु को आगे जीवन में हो सकने वाले गैर संचारी रोगों के खतरे को काम करता है। स्तनपान शिशु को निमोनिया व दस्त से बचाव में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
उन्होंने बताया कि मां के दूध में पानी व पोषक तत्वों की मात्रा पूरी होती है इसलिए पहले 6 महीने में केवल मां का दूध ही दें। बीमारी के दौरान अपने 6 माह से छोटे बच्चों को केवल अपना दूध ही पिलाये यदि आपका बच्चा 6 महीने से बड़ा है तो उसे मां के दूध के साथ-साथ अन्य खाद्य और तरल पदार्थ थोड़ी-थोड़ी मात्रा में अधिक बार दे। मां का दूध बच्चों के मस्तिष्क के विकास में अत्यंत आवश्यक है। दिन हो या रात बच्चों को उसकी आवश्यकता अनुसार माता अपना दूध पिलाये। बार-बार दूध पिलाने से मां के दूध की मात्रा बढ़ती है। बच्चों को दूध पिलाने की वजह से मां को भी फायदा होता है। जिन स्त्रियों ने अपने बच्चों को स्तनपान कराया होता है उनमें सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा कम हो जाता है।
