चंडीगढ़। हरियाणा में बढ़े कलेक्टर रेट पहली अगस्त से ही लागू होंगे। सभी मंडलायुक्तों और उपायुक्तों को कल बृहस्पतिवार तक हितधारकों से मिली शिकायतें और आपत्तियां निपटाने को कहा गया है। नया कलेक्टर रेट लागू होते ही जमीन की कीमतें बढ़ जाएंगी, जिससे घर बनाना भी महंगा होगा। वित्तायुक्त राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से इस संबंध में आदेश जारी कर दिया गया है।
विभाग की ओर से विगत 16 जून और 23 जुलाई को जारी आदेशों को हवाला देते हुए कहा गया है कि वित्त वर्ष 2024-25 के लिए कलेक्टर रेट समय पर निर्धारित नहीं किए जा सके थे, जिसके चलते पिछले साल एक दिसंबर को ही नई दरें लागू की जा सकीं।

यह सिलसिला अब तक जारी है क्योंकि कलेक्टर रेट की नई दरों को मार्च तक फिर से अंतिम रूप नहीं दिया जा सका। इसलिए संशोधित कलेक्टर रेट को पहली अगस्त से ही लागू किया जाए क्योंकि यह बढ़ी हुई लेनदेन राशि का केवल एक अंश ही कवर करता है।

अंतिम रूप देने से पहले अपनानी होगी तय प्रक्रिया

इससे पहले विगत बुधवार को कलेक्टर रेट बढ़ाने के आदेश जारी हुए थे। मामले ने तूल पकड़ा तो वित्तायुक्त राजस्व डॉ. सुमिता मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा था कि सरकार ने नए कलेक्टर रेट लागू करने का फैसला जरूर लिया है, लेकिन इसे अंतिम रूप देने से पहले तय प्रक्रिया अपनानी होगी।

इसमें कलेक्टर रेट की सूची को सार्वजनिक करना, उस पर आमजन से आपत्तियां और सुझाव मंगवाना जैसे चरण शामिल हैं। अभी यह सूची सार्वजनिक नहीं की गई है, जबकि नियमों के मुताबिक इसे कम से कम एक महीने पहले सार्वजनिक कर आपत्तियां मांगी जाती हैं। इसी प्रक्रिया की अनुपालना के अभाव में एक अगस्त से कलेक्टर रेट लागू करना संभव नहीं दिख रहा। इसके बाद कयास लगाए जा रहे थे कि बढ़ा कलेक्टर रेट अभी लागू नहीं होगा।

बढ़ी दरें पहली अगस्त से होंगी लागू

मंगलवार को वित्तायुक्त राजस्व कार्यालय की ओर से जारी नए आदेशों में स्पष्ट कर दिया गया है कि बढ़ी दरें पहली अगस्त से ही लागू होंगी। नए कलेक्टर रेट के लिए विभिन्न स्थानों पर पांच से 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव है।

कलेक्टर रेट किसी भी जिले में जमीन की वह न्यूनतम कीमत है, जिस पर कोई रियल एस्टेट प्रापर्टी खरीदार को बेची जा सकती है। इसी पर तहसीलों में प्रापर्टी की रजिस्ट्री होती है। कलेक्टर रेट समय-समय पर बदलता रहता है, जो स्थान और बाजार के रुझान पर निर्भर करता है।

जमीन की खरीद फरोख्त को लेकर कलेक्टर रेट बेहद अहम होता है। अलग-अलग स्थानों पर वहां के हालात और मार्केट रिसर्च के बाद ही वेल्यू कमेटी अपनी रिपोर्ट देती है। इसके बाद ही रेट बढ़ाने का फैसला होता है।

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