आध्यात्मिक ज्ञान और अनथक सेवा भाव की चैतन्य मूर्ति थी–दीदी मनमोहिनी
कुरुक्षेत्र।
ब्रह्माकुमारीज: मुख्यालय माउंट आबू की प्रथम अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका दीदी मनमोहिनी के पुण्य स्मृति दिवस पर विश्व शांति धाम कुरूक्षेत्र सेवा केंद्र में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया गया। कुरूक्षेत्र सेवा केंद्र की इंचार्ज राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरोज बहन ने दीदी मनमोहिनी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके जीवन का संक्षिप्त वर्णन किया। उन्होंने बताया कि प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय माउंट आबू की प्रथम अतिरिक्त मुख्य प्रशासिका दीदी मन मोहिनी रुद्र ज्ञान यज्ञ के शुरुआती दिनों में 1936- 37 में यज्ञ के कार्यों में शामिल हो गई थी। उन्होंने बताया कि बहुत ही धनाढ्य सिंधी परिवार से होते हुए भी अति सरल हृदय वाली और शालीनता से भरपूर थी। परमात्मा में अटूट विश्वास व प्यार था, जो विस्तृत सेवा में मददगार बना। उस समय उनका लौकिक नाम गोपी था, परंतु ब्रह्मा बाबा के साथ फॉलो करते हुए हम उन्हें अपना पूर्वज समझते हैं। बहन जी ने कहा कि दीदी ने अपना तन- मन -धन पूर्ण रूप से जन जागृति में लगा दिया था। बाबा के कार्यों में जो भी सहयोग हम सब की तरफ से होता था उसकी व्यवस्था को बनाए रखने में सहयोग देने का कार्य दीदी के द्वारा किया जाता था। दीदी अपने कर्म से साधारण वातावरण को भी आध्यात्मिक बना देती थी, उनके व्यक्तित्व में चुंबकीय आकर्षण था इसी कारण बाबा ने उनका नाम गोपी से मन मोहिनी रख दिया। बहन जी ने आगे कहा कि माउंट आबू में देश-विदेश के हजारों बहनजी भाइयों का आना -जाना होता है उन सब के रहने और भोजन की व्यवस्था को देखना आसान कार्य नहीं होता परंतु दीदी छोटे से छोटे कार्यों पर विशेष ध्यान देती थी और प्रत्येक समस्या पर विचार मंथन करके समाधान निकलने में विश्वास करती थी। आगे सरोज बहन जी ने उनके व्यक्तित्व की अनेकों विशेषताओं का बखान करते हुए बताया कि त्याग, तपस्या और निश्चय के बल पर अनेकों सेवा केंद्र खोलने के निमित्त बनी, सदा गोडली स्टूडेंट समझ कर चलती थी, लव और ला का बैलेंस रखती थी, कुशाग्र बुद्धि, परखने की शक्ति, दूर दृष्टि, मर्यादाओं में दृढ़ निश्चय, अद्भुत साहस, स्नेह, आत्मविश्वास, सादगी, निर्माणता की मूर्ति आदि न जाने कितनी विशेषताओं की धनी थी। बहन जी ने कहा कि सदा ईश्वरीय मर्यादाओं का कंगन बांधने वाली -ऐसी थी हमारे आदरणीय मन मोहिनी दीदी। अंत में बहन जी ने कहा कि आज के दिन हम भी बाबा के यज्ञ में तन मन धन कैसे अर्पण करें,उनके बताए मार्ग पर चलना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि देना होगा । प्रातः मुरली क्लास में आए हुए सभी बीके बहन- भाइयों ने दीदी के चित्र पर स्नेह सुमन अर्पण कर अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए और ईश्वरीय प्रसाद पाकर स्वयं को धन्य अनुभव किया।
