चंडीगढ़। कोविड-19 की मार हरियाणा के सांसदाें को मिलने वाली ग्रांट पर भी पड़ी। हालांकि, केंद्र सरकार ने कोविड-19 के कारण देशभर के सभी सांसदों की ग्रांट को सस्पेंड कर दिया था। इसे फिर से बहाल तो किया गया, लेकिन 2021-22 के लिए सांसदों को पांच करोड़ की बजाय एकमुश्त दो करोड़ रुपये की ग्रांट ही मिली।
17वीं लोकसभा में हरियाणा के दस पार्लियामेंट क्षेत्रों में से नौ में 17-17 करोड़ रुपये की ग्रांट जारी हुई। अंबाला संसदीय क्षेत्र के लिए 17 करोड़ की बजाय 12 करोड़ रुपये ही मंजूर हुए। इनमें से भी सात करोड़ रुपये के ही विकास कार्य हो पाए।
पांच करोड़ रुपये की ग्रांट पेंडिंग ही रही। ग्रांट रुकने की सबसे बड़ी वजह यह भी रही कि यहां से सांसद और केंद्रीय राज्य मंत्री रहे रतनलाल कटारिया लंबे समय तक बीमार रहे। फिर उनके निधन के बाद एक साल के करीब यह संसदीय सीट खाली भी रही। इस वजह से एमपी लैंड के तहत मिलने वाली ग्रांट का उपयोग इस क्षेत्र में नहीं हो पाया।
17वीं लोकसभा के लिए हुए चुनावों में हरियाणा की सभी 10 संसदीय सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की थी। सांसदों को हर साल पांच करोड़ रुपये की ग्रांट मिलती है। रोहतक, सोनीपत, हिसार, सिरसा, कुरुक्षेत्र, करनाल, भिवानी-महेंद्रगढ़, गुरुग्राम व फरीदाबाद संसदीय क्षेत्रों में 17-17 करोड़ रुपये की ग्रांट मिली।
अंबाला से कांग्रेस के मौजूदा सांसद वरुण चौधरी द्वारा पार्लियामेंट में इस संदर्भ में सवाल किया। केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने उनके सवाल पर सदन में रिपोर्ट पेश की। वरुण मुलाना का कहना है कि अंबाला संसदीय क्षेत्र के लिए स्वीकृत हुई 12 करोड़ रुपये की ग्रांट में से भी पांच करोड़ की ग्रांट अधिकारियों की लापरवाही की वजह से इस्तेमाल नहीं हो पाई।
उन्होंने सदन में पूछा कि 18वीं लोकसभा के हरियाणा के संसद सदस्यों को आवंटित करने की समय-सीमा क्या है। इस पर केंद्रीय मंत्री ने बताया कि वर्तमान सांसद के खाते में अप्रतिबद्ध शेष राशि स्थानांतरित करने की प्रक्रिया ई-साक्षी पोर्टल पर एमपीलैड्स के पैरा 10.5.1 में उल्लेखित प्रविधानों के तहत संचालित होती है।
