चंडीगढ़। एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कांग्रेस महासचिव एवं राज्यसभा सदस्य रणदीप सिंह सुरजेवाला को निर्देश दिया है कि वे अपनी सुरक्षा जारी रखने की आवश्यकता को सिद्ध करने के लिए प्रासंगिक साक्ष्य प्रस्तुत करें।

यह निर्देश गृह मंत्रालय द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान आया है, जिसमें खतरे की कोई धारणा नहीं होने का हवाला देते हुए सुरजेवाला की सुरक्षा हटाने की अदालत से अनुमति मांगी गई है।

हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि रणदीप सुरजेवाला इस आदेश की तारीख से चार सप्ताह की अवधि के भीतर सभी प्रासंगिक सामग्री संबंधित सक्षम प्राधिकरण को प्रस्तुत करें। इसके बाद संबंधित प्राधिकरण उन्हें सुनवाई का पूरा अवसर प्रदान कर इस विषय में शीघ्रता से निर्णय लेगा।

यह आदेश जस्टिस कुलदीप तिवारी ने उस याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया, जो केंद्र सरकार द्वारा सुरजेवाला को दी गई सुरक्षा वापस लेने की अनुमति के लिए दायर की गई थी।

गृह मंत्रालय की ओर से हाई कोर्ट को अवगत कराया गया कि केंद्रीय सुरक्षा एजेंसी द्वारा की गई ताजा खतरे की समीक्षा के अनुसार सुरजेवाला को वर्तमान में कोई विशिष्ट खतरा नहीं है और इसी आधार पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उनकी सुरक्षा हटाने का प्रस्ताव रखा है।

इस पर सुरजेवाला की ओर से उनके वकील ने कहा कि उनके मुवक्किल को अब भी खतरे की आशंका है और वह संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष पेश होकर इस संबंध में सभी आवश्यक सामग्री प्रस्तुत करना चाहते हैं, ताकि खतरे की धारणा को सिद्ध किया जा सके।

दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस तिवारी ने कहा कि अदालत इसे उपयुक्त मानती है कि सुरजेवाला को संबंधित प्राधिकरणों के समक्ष पेश होने की अनुमति दी जाए।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सुरजेवाला को यह स्वतंत्रता दी जाती है कि वे खतरे की आशंका को साबित करने के लिए सभी आवश्यक और प्रासंगिक सामग्री प्रस्तुत कर सकें। अब इस मामले की अगली सुनवाई 30 सितंबर को होगी।

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