करनाल, 11 जुलाई।  कृषि विभाग के उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि जिला में खरीफ सीजन में लगभग 5 लाख 30 हजार एकड़ में विभिन्न फसलों की कास्त की जाती है, जिसमें लगभग 4 लाख 50 हजार एकड़ में धान की फसल, 42 हजार एकड़ में गन्ना फसल व 38 हजार एकड़ में अन्य दूसरी फसलों की बिजाई की जाती है। इन सभी खरीफ फसलों के लिए जिले में लगभग 95 हजार एम.टी. यूरिया व 20 हजार एम.टी. डी.ए.पी. खाद की आवश्यकता होती है। जिला में अब तक डी.ए.पी. खाद की आपूर्ति लगभग पूरी हो चुकी है तथा यूरिया खाद की 72 हजार 400 एम.टी. की बिक्री की जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि यूरिया व डी.ए.पी. व अन्य खादों की आवश्यकता अनुसार मांग व पूर्ति को सुनिश्चित करने के लिए जिला में खाद विक्रेताओं द्वारा टैगिंग, कालाबाजारी व अन्य गैर-कानूनी गतिविधियों की रोकथाम के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया था । इस कमेटी में उपमंडल अधिकारी, (नागरिक), तहसीलदार, नायब तहसीलदार, उप मण्डल कृषि अधिकारी, गुण नियंत्रण निरीक्षक, सहायक पौधा संरक्षक अधिकारी सदस्य नियुक्त किए गए हैं। जिला में इस कमेटी द्वारा खाद व कीटनाशक विक्रेताओं का समय-समय पर औचक निरीक्षण किया जा रहा है। जिसमें से ईश्वर, प्रेम ,पवन कुमार, मोहन इन्टरप्राईजिज,व सोनी बीज भण्डार, घरौंडा के स्टाॅक व दस्तावेजों में अनियमितताएं पाई गई। इन सभी के खाद लाईसैन्स (थोक व खुदरा) तुरन्त प्रभाव से निलम्बित कर दिये गये हैं।
उपनिदेशक डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि कृषि विभाग द्वारा सभी खाद विक्रेताओं को लगातार निर्देश दिये जा रहे हैं कि खाद किसी भी पड़ौसी राज्य में न जाए, खाद के उपलब्ध स्टाॅक व पोस मशीन के स्टाॅक का सही मिलान करें, प्रत्येक विक्रेता के परिसर में स्टाॅक व मूल्य का प्रदर्शन अनिवार्य रूप से करें व खाद की कालाबाजरी, जमाखोरी न की जाए तथा खाद के साथ अन्य उत्पाद लगाकर न बेचे जाएं। उन्होंने बताया कि जिला में यूरिया व डी.ए.पी. खाद की पर्याप्त मात्रा उपलब्ध है। आगामी तीन-चार दिनों में लगभग एक लाख बैग यूरिया आने की सम्भावना है।  उन्होंने किसान भाईयों से आह्वान किया जाता है कि वे अपनी खेत की मिट्टी की जांच करवाएं तथा मृदा स्वास्थ्य कार्ड अनुसार ही अपने खेत में यूरिया व डी.ए.पी. का इस्तेमाल करें।

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