अंबाला। प्रदेश में भवन व अन्य सन्निर्माण के कार्य में जुड़े श्रमिकों के कल्याण के लिए विभिन्न योजनाओं में घोटाला उजागर होने के बाद अब श्रम विभाग के अधिकारी भी फील्ड में उतरेंगे जो फैक्ट्रियों और उद्योगों में श्रम नियमों की कितनी पालना हो रही है, इसकी जांच करेंगे।

इतना ही नहीं बिना रजिस्ट्रेशन के भी कारोबार किया जा रहा है, जिसकी परतें भी अब सामने आ जाएंगी। हरियाणा के श्रम, परिवहन और ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने इस मामले में आदेश जारी कर दिए हैं। यह आदेश पंजीकृत श्रमिकों की कार्य रसीद के भौतिक सत्यापन के लिए सामने आई अनियमितताओं के बाद दिए गए हैं।
हालांकि, इसके लिए हर जिले में डीसी को तीन सदस्यीय कमेटी बनानी होगी, जिसकी रिपोर्ट के बाद साफ होगा कि यह खेल छह जिलों के अलावा और कहां-कहां खेला जा रहा था। अब फैक्ट्रियों और उद्योगों की जांच रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को देनी होगी।

इन योजनाओं का मिलता है लाभ, जिसमें हुआ खेल

भवन निर्माण में लगे पंजीकृत श्रमिकों को मातृत्व लाभ 36 हजार रुपये, पितृत्व लाभ 21 हजार रुपये, बच्चों की शिक्षा के लिए पहली कक्षा से उच्च शिक्षा तक की वार्षिक वित्तीय सहायता आठ हजार रुपये से 20 हजार रुपये, मेधावी बच्चों के 10वीं/12वी की परीक्षा में 60 प्रतिशत से 90 प्रतिशत अंक प्राप्ति पर 21 से 51 हजार छात्रवृत्ति, प्रोफेशनल व टेक्निकल कोर्स हेतु पूर्ण शैक्षणिक व्यय की प्रतिपूर्ति, कामगार के बच्चों को व्यवसायिक संस्थानों में होस्टल सुविधा हेतु 1 लाख 20 हजार, व्यावसायिक कोर्स की कोचिंग हेतु 20 हजार से एक लाख, पुत्री के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर की खरीद के लिए 50 हजार, लैपटॉप हेतु 49 हजार की राशि दी जाती है।

साइकिल खरीद के लिए पांच हजार, औजार के लिए अनुदान आठ हजार, सिलाई मशीन के लिए साढ़े चार हजार, मुख्यमंत्री महिला निर्माण श्रमिक सम्मान योजना के तहत पांच हजार रुपये, कन्यादान योजना के तहत तीन बच्चों की शादी हेतु वित्तीय सहायता (सुपुत्री) के लिए एक लाख एक हजार, महिला श्रमिक की स्वयं की शादी हेतु वित्तीय सहायता 50 हजार रुपये दिए जाते हैं।

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