45 दिवसीय इंटर्नशिप में मिल रहा आहार-विहार, योग और घरेलू उपचारों का जीवन उपयोगी ज्ञान

कुरुक्षेत्र, 1 जुलाई।
 कॉलेज की पढ़ाई में इतिहास,राजनीति और विज्ञान के साथ अगर जीवनशैली सुधार और हेल्थ केयर की ट्रेनिंग भी मिल जाए तो पढ़ाई असल मायने में सार्थक हो जाती है। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय ने इसी सोच को साकार करते हुए एक अनोखी पहल की है। 45 दिवसीय ‘सेल्फ हेल्थ केयर स्किल डेवलपमेंट इंटर्नशिप प्रोग्राम’,जिसमें विद्यार्थियों को पहली बार स्वास्थ्य के व्यावहारिक पहलुओं की गहराई से जानकारी दी जा रही है। आयुष विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किए गए इस इंटर्नशिप प्रोग्राम के पहले बैच में राजकीय कन्या महाविद्यालय, पलवल (कुरुक्षेत्र) की  छात्राएं ऋतुचर्या,योगासन,घरेलू चिकित्सा,आहार-विहार और रोगों की पहचान व रोकथाम जैसे विषयों की प्रतिदिन गहन ट्रेनिंग ले रही हैं। आयुष विवि के विशेषज्ञ उन्हें आयुर्वेदिक जीवन शैली को अपनाकर कैसे स्वयं को और अपने परिवार को रोगों से सुरक्षित रखा जा सकता है यह सिखा रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त कर रही छात्राओं का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें ऐसा व्यावहारिक और जीवन उपयोगी ज्ञान मिलेगा जो हर दिन काम आएगा।
रोजाना 3 घंटे की गहन ट्रेनिंग: प्रो. शुभा
क्रिया शरीर विभाग की प्रोफेसर वैद्य शुभा कौशल ने बताया कि कार्यक्रम में प्रत्येक दिन तीन घंटे की क्लास दी जा रही है, जिसमें ऋतु अनुसार आहार-विहार कैसे बदलें, योग और प्राणायाम से शरीर और मन कैसे संतुलित रखें, घरेलू उपचारों से कैसे छोटी बीमारियों को रोका जा सकता है तथा बिना दवा के जीवन शैली में छोटे बदलाव कर कैसे रोगों से बचाव कर सकते हैं।
स्वस्थ जीवन जीने की कला सीखा रहा आयुष विवि: कुलपति
श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. वैद्य करतार सिंह धीमान ने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि विद्यार्थी सिर्फ डिग्री धारक न बनें,बल्कि वे जीवन में आत्मनिर्भर,रोग मुक्त और संतुलित जीवन शैली की प्रतीक बनें। आयुष विवि द्वारा शुरू की गई यह पहल मात्र इंटर्नशिप प्रोग्राम नहीं है,बल्कि युवा पीढ़ी को स्वस्थ जीवन जीने की कला सिखाने का प्रयास है। आज जब जीवनशैली जनित रोग तेजी से बढ़ रहे हैं,तब यह और भी आवश्यक है कि हमारी युवा पीढ़ी न केवल अपने लिए, बल्कि अपने परिवार और समाज के लिए भी मार्गदर्शक बने। श्री कृष्ण आयुष विश्वविद्यालय ने पहली बार ऐसा व्यावहारिक कार्यक्रम शुरू किया है,जिससे विद्यार्थी स्वस्थ जीवन जीने की वैज्ञानिक और पारंपरिक दोनों समझ हासिल कर सकेंगी। अगर युवा पीढ़ी खुद स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बन जाएं तो वे अपने परिवार और समाज को भी सही दिशा में प्रेरित कर सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *