गीता निकेतन आवासीय विद्यालय, कुरुक्षेत्र में शिक्षकों के सतत् विकास को ध्यान में रखते हुए दिनांक 29 एवं 30 मई 2025 को करियर गाइडेंस पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों को विद्यार्थियों को प्रभावी करियर मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु आवश्यक ज्ञान और कौशल से सुसज्जित करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं माँ सरस्वती की वंदना से हुआ। इस अवसर पर शिक्षकों को प्रशिक्षित करने हेतु आशुतोष गौड़ (निदेशक, सरस्वती विद्या निकेतन, अंबाला) एवं ऋतु सिंगला प्राचार्य (ग्लोब हेरिटेज इंटरनेशनल स्कूल, रादौर) प्रशिक्षक के रूप में उपस्थित रहे।
ऋतु सिंगला ने “करियर मार्गदर्शन का शैक्षिक परिप्रेक्ष्य” विषय पर बोलते हुए शिक्षकों को बताया कि 21वीं सदी में करियर मार्गदर्शन केवल काउंसलर की भूमिका तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षक भी छात्रों के जीवन-निर्माण में एक मार्गदर्शक के रूप में योगदान दे सकते हैं। इसके साथ-साथ उन्होंने करियर विकास के प्रमुख घटक आत्म-चेतना, अवसरों की खोज, निर्णय क्षमता एवं लक्ष्य निर्धारण की विस्तार से व्याख्या की। उन्होंने शिक्षकों को यह भी बताया कि कक्षा में पढ़ाते समय किस प्रकार इन बिंदुओं को विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास से जोड़ा जा सकता है।कार्यशाला के अग्रिम सत्र में आशुतोष गौड़ ने शिक्षकों को विभिन्न करियर क्षेत्रों जैसे पारंपरिक पेशे (चिकित्सा, अभियंत्रण, प्रशासन), नवाचार आधारित क्षेत्र (AI, डेटा साइंस, डिजाइन), एवं वैकल्पिक करियर (खेल, संगीत, सामाजिक सेवा) आदि की जानकारी दी। साथ ही साथ डिजिटल संसाधनों के माध्यम से करियर से संबंधित जानकारी तक कैसे पहुँचें इसके बारे में भी बताया।
कार्यशाला के दूसरे दिन की शुरुआत में आशुतोष गौड़ ने करियर सूचना का संप्रेषण के बारे में शिक्षकों को बताया कि वे किस प्रकार छात्रों तक करियर संबंधी प्रामाणिक, अद्यतन और उपयोगी जानकारी पहुँचा सकते हैं। साथ ही, करियर संबंधित सरकारी पोर्टल जैसे NCS Portal, [Skill India], [AICTE Career Portal] आदि का उपयोग करने की विधि भी सिखाई गई। तत्पश्चात ऋतु सिंगला ने करियर मार्गदर्शन में शिक्षकों की भूमिका का पुनरावलोकन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों की रुचियों, क्षमताओं और अभिरुचियों को पहचानकर उन्हें सही दिशा में प्रेरित कर सकते हैं। चर्चा के दौरान यह भी स्पष्ट किया गया कि शिक्षकों को करियर मार्गदर्शक की भूमिका को कक्षा शिक्षण, व्यावहारिक गतिविधियों और संवाद के माध्यम से समेकित करना चाहिए। अतः कार्यशाला अत्यंत उपयोगी एवं ज्ञानवर्धक रही। इसने शिक्षकों को नई सोच व दृष्टिकोण प्रदान किया, जिससे वे अपने विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन दे सकेंगे। अंत में विद्यालय के प्राचार्य नारायण सिंह ने ज्ञानवर्धक प्रशिक्षण हेतु दोनों विषय विशेषज्ञों का आभार प्रकट किया।
