—————
दर्शकों के अंतर्मन को झकझोर गया नाटक कोर्ट मार्शल
————-
नाटक कोर्ट मार्शल में कलाकारों ने जातिगत भेदभाव पर समाज को दिखाया आईना
कुरुक्षेत्र। हरियाणा कला परिषद द्वारा हिंदी रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य में दो दिवसीय नाट्य समारोह का कला कीर्ति भवन में आयोजन किया गया। जिसमें पहले दिन अभिनय रंगमंच हिसार के कलाकारों द्वारा नाटक कोर्ट मार्शल का मंचन किया गया। नाटक मंचन के दौरान वरिष्ठ रंगकर्मी बृज शर्मा बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के सदस्य अशोक रोशा तथा हिंदू शिक्षा समिति के उपाध्यक्ष चेतराम उपस्थित रहे। मंच का संचालन विकास शर्मा ने किया। कार्यक्रम से पूर्व कला परिषद के निदेशक नागेंद्र शर्मा ने अतिथियों का स्वागत किया। स्वदेश दीपक द्वारा लिखे तथा मनीष जोशी के निर्देशन में तैयार नाटक में दिखाया कि सेना में कुछ उंचे पद के अधिकारी अपने से नीचे पद के जवान के साथ भेदभाव करते हैं, जिसके बाद मानसिक रूप से परेशान होकर जवान अपने अधिकारी का खून कर देता है। जिसके बाद जवान का कोर्ट मार्शल किया जाता है। कोर्ट में प्रिसाईडिंग ऑफिसर कर्नल सूरत सिंह दोनों पक्ष को जानने का प्रयास करते हैं, जिसमें जवान रामचंद्र की ओर से कैप्टन विकास रॉय तथा अधिकारियों की ओर से कैप्टन अजय पुरी केस लड़ते हैं। जवान रामचंद्र पर सेना के नियमों का उल्लघंन करते हुए अपने अधिकारी पर गोली चलाने तथा मर्डर करने का आरोप लगता है। कैप्टन विकास रॉय अन्य अधिकारियों से पूछताछ करते हुए रामचंद्र की पैरवी करती हैं। पूछताछ में पता चलता है कि रामचंद्र नीची जाति का होने के कारण आला अधिकारी रामचंद्र को जातिसूचक शब्द कहते थे तथा उसकी मां के चरित्र के लिए भी बोलते थे। जिसके कारण रामचंद्र ने गोली चलाई। कर्नल सूरत सिंह कोई भी फैसला सुनाने में खुद को असमर्थ समझते हैं और रामचंद्र को अपनी एक पार्टी में आमंत्रित करते हैं। कैप्टन कपूर भी उस पार्टी में शामिल होते हैं लेकिन पार्टी में कोई भी कैप्टन कपूर के साथ अच्छे से पेश नहीं आता। कैप्टन कपूर स्वयं को बेइज्जत महसूस करते हैं और खुद को गोली मार लेते हैं। इस प्रकार उंच नीच के भेदभाव को समाप्त करने में नाटक एक अच्छी सीख देने में कामयाब रहा। नाटक के दौरान आलम ऐसा था कि दर्शक एकाग्र होकर प्रस्तुति देख रहे थे, तथा नाटक के बाद जोरदार तालिंया बजाते हुए कलाकारों की हौंसला अफजाई की गई। नाटक में स्नेहा बिश्नोई, अभिषेक, अमित अग्रवाल, विकास मेहता, संदीप चहल, लोकेश विवेक, रितिक कक्कड़, सचिन, गौरव शर्मा, संजय बिश्नोई, पिंकी, शिवम, राम नारायण तथा विशाल ने अपनी प्रतिभा के जौहर दिखाए। प्रकाश व्यवस्था मध्ुार भाटिया ने सम्भाली। नाटक के अंत में समस्त कलाकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि बृज शर्मा ने संबोधित करते हुए कहा कि साहित्य समाज का दर्पण होता है। उसमें सामाजिक जीवन व्यवस्था, सामाजिक समस्याओं पर विकल्प की खोज और विचार विमर्श निरंतर होते रहे हैं। समाज में घटित अमानवीय व्यवहार का चित्रण भी साहित्य में होता रहा है। ठीक इसी तरह कोर्ट मार्शल नाटक में अमानवीय व्यवहार का चित्रण सीख देता है कि एक ईमानदार व्यक्ति के सदा हमेशा अच्छा हेाता है और बुरा व्यक्ति कितना भी चालाक क्यूं न हो एक न एक दिन उसे सजा जरूर मिलती है। इस मौके पर शिवकुमार किरमच, पुरुषोत्तम अपराधी, कपिल बत्रा, नीरज सेठी, चंद्रशेखर शर्मा, विरेन आदि कला प्रेमी उपस्थित रहे।